Copper Water Side Effect: आजकल देखो तो हर कोई हाथ में तांबे की बोतल लिए घूम रहा है। हमें लगता है कि जितना ज्यादा तांबे का पानी पिएंगे, उतने ही फिट रहेंगे। आयुर्वेद में जिसे अमृत कहा गया है, वही तांबा आपकी एक छोटी सी गलती से आपके शरीर के लिए जहर भी बन सकता है। क्या आप भी सुबह से शाम तक बस तांबे की बोतल से ही पानी गटक रहे हैं? अगर हां, तो आप अनजाने में अपने लिवर और किडनी को खतरे में डाल रहे हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो तांबे के पानी को पीने का एक खास तरीका और समय होता है, वरना ये सीधे आपके लिवर पर अटैक करता है।
आखिर क्यों तांबे का ये शौक आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है और इसके क्या-क्या खतरनाक नुकसान हैं, चलिए डॉक्टर तिलकराज अरोड़ा (वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक)से जानते हैं।
1. लिवर पर पड़ता है भारी बोझ
हमारा लिवर शरीर की लैब जैसा होता है, लेकिन जब हम दिन-भर तांबे का पानी पीते हैं, तो शरीर में तांबा बढ़ जाता है। बेचारा लिवर इसे साफ नहीं कर पाता और धीरे-धीरे थकने लगता है। अगर ये सिलसिला चलता रहा, तो लिवर में सूजन आ सकती है और लंबे समय में ये फेल भी हो सकता है।
2. पेट में मरोड़ और उल्टी जैसा मन
क्या कभी तांबे का पानी पीने के बाद आपको अजीब सी बेचैनी या पेट में मरोड़ महसूस हुई है? दरअसल, अगर पानी तांबे के बर्तन में बहुत ज्यादा देर तक रखा रहे, तो उसमें धातु के कण घुल जाते हैं। इसे पीते ही जी मिचलाना और पेट दर्द जैसी समस्या शुरू हो जाती है।
3. फूड पॉइजनिंग का खतरा
कई लोग गलती से तांबे के गिलास में नींबू पानी या शिकंजी बना लेते हैं। तांबा और खट्टी चीजें एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं। जैसे ही ये मिलते हैं, एक केमिकल रिएक्शन होता है जो पानी को जहरीला बना देता है। इसे पीते ही आपको तुरंत फूड पॉइजनिंग हो सकती है।
4. किडनी को होती है फिल्टर करने में आफत
जैसे लिवर पर बोझ पड़ता है, वैसे ही हमारी किडनी भी इस एक्स्ट्रा तांबे को शरीर से बाहर निकालने में पसीने छोड़ देती है। किडनी का काम है खून साफ करना, लेकिन भारी धातु (Heavy Metal) होने की वजह से तांबा किडनी के फिल्टर को जाम करने लगता है।
5. शरीर की नसें और दिमाग पर असर
होम्योपैथी एक्सपर्ट्स बताते हैं कि तांबे की अधिकता से इंसान को चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। शरीर में तांबा बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो ये दिमाग की नसों और मांसपेशियों में खिंचाव पैदा कर सकता है, जिससे हर वक्त थकावट महसूस होती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


