ट्रेड लाइसेंस पर भड़के होटल संचालक:मेयर का किया विरोध, बोले- व्यापारियों का टैक्स माफ तो हमसे 2 गुना वसूली क्यों

ट्रेड लाइसेंस पर भड़के होटल संचालक:मेयर का किया विरोध, बोले- व्यापारियों का टैक्स माफ तो हमसे 2 गुना वसूली क्यों

आगरा में ट्रेड लाइसेंस शुल्क को लेकर होटल संचालकों में भारी आक्रोश है। सोमवार को होटल एसोसिएशन की बैठक में पदाधिकारियों ने निगम पर शोषण का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि अगर सदन में होटल ट्रेड लाइसेंस शुल्क रद्द नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरकर होटल-रेस्टोरेंट बंद करेंगे। नगर निगम ने 1 सितंबर 2025 को सदन की बैठक में ट्रेड लाइसेंस का प्रस्ताव पास किया था। प्रस्ताव पास होने के बाद निगम शहर के व्यापारियों से ट्रेड शुल्क वसूलने पर व्यापारियों ने इसका भारी विरोध किया। मेयर और अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए। बात न बनने पर व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। लगातार विरोध के बाद नगर निगम ने अब व्यापारियों के लिए ट्रेड लाइसेंस शुल्क को रद्द कर दिया। होटल वालों से वसूली जारी, बोले- ये कैसा सबका साथ-सबका विकास
होटल संचालकों का आरोप है कि निगम उनके साथ दोहरा रवैया अपना रहा है। व्यापारियों का टैक्स माफ किया जा रहा है, वहीं होटल संचालकों से दोगुना ट्रेड शुल्क वसूला जा रहा है। सोमवार को होटल एसोसिएशन ने बैठक कर ट्रेड शुल्क का विरोध जताया। संगठन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा-एक तरफ सरकार कहती है सबका साथ-सबका विकास, वहीं आगरा नगर निगम मेयर व्यापारियों का ट्रेड लाइसेंस रद्द कर रही है और हमसे दोगुना वसूली कर रही है। यह होटल संचालकों का शोषण है। पदाधिकारी राजकुमार खंडेलवाल ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में 1 से 10 कमरे वाले होटल का सालाना ट्रेड शुल्क 1000 रुपये है। 1 से 20 कमरों का 3000 रुपये और 30 कमरों का 6000 रुपये है। फाइव स्टार होटल का 12000 रुपये सालाना है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 10 कमरों का शुल्क 1 हजार है तो 30 कमरों का 3 हजार रुपए होना चाहिए था, लेकिन हमसे 30 कमरों का 6 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। यह सीधे-सीधे दोगुनी वसूली है।होटल एसोसिएशन ने मांग की कि जब सभी व्यवसायों के लिए ट्रेड टैक्स समाप्त किया जा रहा है तो एक समान नीति के तहत होटल पर लगने वाला टैक्स भी खत्म होना चाहिए। पदाधिकारियों ने कहा-कल सदन में होटल ट्रेड लाइसेंस शुल्क भी रद्द होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो हम उग्र प्रदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरेंगे और होटल-रेस्टोरेंट बंद कर विरोध जताएंगे। होटल संचालकों का कहना है कि वे पहले से जीएसटी, लाइसेंस फीस और अन्य टैक्स दे रहे हैं। ऊपर से ट्रेड लाइसेंस का अतिरिक्त बोझ उनके कारोबार को प्रभावित कर रहा है। अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली सदन की बैठक पर टिकी हैं।

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