मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 22 सालों तक सेवा देने वाले शिक्षक को हटाने की कार्रवाई को मनमाना और अनुचित करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सेवा लेने के बाद नियुक्ति पर सवाल उठाकर कर्मचारी को हटाना न्यायसंगत नहीं है। मामला अटल बिहारी शर्मा का है, जिन्हें साल 2000 में भिंड जिले के डॉ. भीमराव अंबेडकर प्राथमिक विद्यालय में लोअर डिवीजन शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था। चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ था और जिला स्तर की जांच में नियुक्ति सही पाई गई थी। वेतन रोका फिर हटाने की कार्रवाई कई साल बाद शासन ने नियुक्ति को नियमों के विपरीत बताते हुए पहले वेतन रोका और फिर सेवा से हटाने की प्रक्रिया शुरू की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने बिना विवाद लंबे समय तक सेवाएं दीं और विभाग ने लगातार उनसे काम लिया। ऐसे में अचानक कार्रवाई प्रशासनिक असंगति को दर्शाती है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से कर्मचारी के जीवन और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 90 दिन में निर्णय लेने का निर्देश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 90 दिनों के भीतर मामले पर पुनर्विचार कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि निर्णय लेते समय सेवा अवधि, चयन प्रक्रिया और पूर्व जांच के निष्कर्षों को ध्यान में रखा जाए।


