उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में झमाझम बारिश और तेज आंधी ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दिलाई है, वहीं बुंदेलखंड के इलाकों में सूरज के तीखे तेवर अभी भी बरकरार हैं। मंगलवार को बांदा 43.6 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। पश्चिमी यूपी में मौसम हुआ खुशनुमा
बीते कुछ दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बिजनौर जैसे जिलों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मंगलवार को मुरादाबाद में 12.8 मिमी और बरेली में 11.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके साथ ही सहारनपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर और आगरा में 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चली, जिससे जनजीवन तो प्रभावित हुआ लेकिन तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। मौसम की तस्वीरें- अगले 24 घंटों के लिए मौसम विभाग की चेतावनी
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव बुधवार तक बना रहेगा। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के निम्नलिखित पूर्वी और तराई वाले जिलों के लिए तेज हवा और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है। गुरुवार से फिर बढ़ेगा पारा
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बुधवार के बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा। बृहस्पतिवार से प्रदेश में आसमान साफ होगा और पछुआ हवाओं के चलते तापमान में वृद्धि शुरू हो जाएगी। मई के दूसरे पखवाड़े की शुरुआत के साथ ही गर्मी एक बार फिर अपना प्रचंड रूप दिखा सकती है। यहां है तेज हवा और गरज चमक की चेतावनी
देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच। अगले 4 दिन कैसा रहेगा मौसम? मौसम में उतार-चढ़ाव क्यों हो रहा?
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड के पहाड़ों पर मौसम लगातार बदल रहा है। कहीं बर्फबारी तो कहीं बारिश हो रही है। किसी-किसी दिन धूप के साथ मौसम साफ हो जा रहा है। अगले कुछ दिन ऐसे ही उतार-चढ़ाव के आसार हैं। इसका असर यूपी में दिख रहा है। पहाड़ों से आने वाली हवाएं मौसम को ठंडा बनाए हैं। बारिश के अनुकूल सिस्टम तैयार कर रही हैं। इस साल मानसून में कम बारिश का अनुमान
निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, मानसून में बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है। जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिमी. है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90% से 95% के बीच रहेगी। एजेंसी ने 94% बारिश का अनुमान दिया है। जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं। सवाल- लू लगने से बचने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- गर्मी में सिर्फ धूप से बचना ही काफी नहीं है, बल्कि सही आदतें अपनाना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी-सी सावधानी लू जैसी गंभीर समस्या से बचा सकती है। गर्मी से कैसे बचें, ग्राफिक से समझिए यूपी में भी मानसून में कम बारिश होगी, वजह जानिए
जून से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश में भी सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। अल-नीनो और ला-नीना के बारे में जानिए ————————


