खुशखबरी: श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ हाईवे बनेगा फोरलेन, 1022 करोड़ की परियोजना, किसानों से लेंगे 800 बीघा जमीन

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ के बीच 75.5 किलोमीटर लंबे नेशनल हाइवे-62 को टू-लेन से फोरलेन में बदलने की प्रक्रिया अब धरातल पर आने लगी है। इसके लिए अवाप्त की जाने वाली भूमि का सर्वे होने के बाद नेशनल हाइवे एक्ट की धारा 3 डी कार्यवाही शुरू हो चुकी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के लिए 1022.57 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।

फोरलेन में बदलने के लिए लगभग 800 बीघा भूमि अवाप्त की जाएगी। इसके लिए नेशनल हाइवे एक्ट के तहत शुरू की गई धारा 3 डी की कार्यवाही में यह जानकारी एकत्र की जाएगी कि कितनी भूमि, किन काश्तकारों की कहां-कहां अवाप्त की जाएगी। इसके अलावा इस कार्यवाही में भूमि की कीमत का पता लगाने के साथ यह भी तय किया जाएगा कि किसानों को उनकी भूमि का कितना मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की राशि किसानों में वितरित करने के लिए संबंधित उपखंड अधिकारी के खाते में आएगी।

किसानों को दिए जाएंगे नोटिस

नेशनल हाइवे-62 को टू-लेन से फोरलेन में बदलने के लिए जिन किसानों की भूमि अवाप्त की जाएगी, उन्हें भूमि अवाप्ति अधिकारी को नोटिस दिए जाएंगे। इनमें अवाप्त की जाने वाली भूमि और उसकी एवज में दिए जाने वाले मुआवजे का उल्लेख होगा। इसके साथ ही नेशनल हाइवे एक्ट की धारा 3 ई के तहत सार्वजनिक विज्ञप्ति का प्रकाशन किया जाएगा। किसानों को उनकी भूमि का मुआवजा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से तय किए गए मानकों के अनुसार दिया जाएगा।

निविदा प्रक्रिया शुरू

फोरलेन प्रोजक्ट की ताजा रिपोर्ट्स और टेंडर सूचनाओं के अनुसार, इस कार्य के लिए ‘इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन’ मोड पर निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। कुछ निविदाओं की अंतिम तिथि मई 2026 तक निर्धारित की गई है। निविदाओं में थोड़ी बहुत देरी होने के बावजूद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की योजना इसी साल में प्रोजेक्ट का काम शुरू करवाने की है।

फोरलेन प्रोजेक्ट: एक नजर

मार्ग की कुल लंबाई – 75.5 किलोमीटर
अनुमानित लागत – 1022.57 करोड़
लेन की संख्या – टू लेन से फोर-लेन (डिवाइडर सहित)
प्रोजेक्ट का महत्व- सेना की आवाजाही में सुगमता।
निर्माण कब तक शुरू – वर्ष 2026 के मध्य तक।

आमजन को लाभ

  • दुर्घटनाओं में कमी: वर्तमान में टू-लेन होने और भारी वाहनों के अधिक दबाव के कारण इस मार्ग पर दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। फोरलेन बनने और बीच में डिवाइडर आने से सुरक्षा बढ़ेगी।
  • समय की बचत: श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ के बीच लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा, जिससे स्थानीय व्यापार और खेती (मंडी आवाजाही) को गति मिलेगी।
  • बेहतर कनेक्टिविटी: यह मार्ग न केवल सूरतगढ़ बल्कि बीकानेर और आगे जोधपुर की कनेक्टिविटी को भी सुधारेगा।

श्रीगंगानगर से सूरतगढ़ तक फोरलेन प्रोजेक्ट के सर्वे का काम पूरा कर नेशनल हाइवे एक्ट की धारा 3 डी की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि मई माह में धारा 3 डी के साथ धारा 3 ई की कार्यवाही को भी पूर्ण कर लिया जाएगा।
सुभाष कुमार, अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन), श्रीगंगानगर

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