जयपुर। एसएमएस अस्पताल में चिकित्सकों ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जनरल सर्जरी विभाग की टीम ने 19 वर्षीय युवक के पेट से करीब 5 किलोग्राम वजनी तिल्ली (स्प्लीन) निकालकर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि अस्पताल में इस तरह की पहली सफल सर्जरी का दावा भी किया है। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार बताया जा रहा है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है।
जानकारी के अनुसार झालावाड़ निवासी युवक लंबे समय से एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी ‘गौशर रोग’ से पीड़ित था। इस बीमारी के कारण उसकी तिल्ली असामान्य रूप से बढ़ती जा रही थी। तिल्ली के अत्यधिक बढ़ने से उसके शरीर में खून की कमी होने लगी और प्लेटलेट्स का स्तर भी लगातार गिरता जा रहा था। इसके अलावा मरीज को पेट में सूजन, जल्दी थकान और थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। परिजनों ने कई शहरों में इलाज करवाया, लेकिन कहीं भी संतोषजनक परिणाम नहीं मिला।
ऐसे चला बीमारी का पता
अंततः युवक को जयपुर के एसएमएस अस्पताल लाया गया, जहां हेमेटोलॉजी विभाग में विस्तृत जांच के बाद गौशर रोग की पुष्टि हुई। चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी ग्लूकोसेरेब्रोसिडेज नामक एंजाइम की कमी के कारण होती है, जिससे शरीर में वसा का असामान्य संचय होने लगता है और अंगों का आकार बढ़ने लगता है। मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला लिया।
डॉक्टर ने क्या कहा?
सीनियर सर्जन डॉ. आर.जी. खंडेलवाल ने बताया कि 16 अप्रैल को डॉ. राजेंद्र मांडिया के मार्गदर्शन में यह ऑपरेशन किया गया, जो करीब ढाई घंटे तक चला। सर्जरी के दौरान 5 किलोग्राम वजनी तिल्ली को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों की टीम ने बेहद सावधानी और सटीकता के साथ कार्य किया, क्योंकि यह प्रक्रिया काफी जोखिम भरी थी।
टीम में ये लोग रहे शामिल
इस जटिल सर्जरी में डॉ. आर.जी. खंडेलवाल, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. मनोज सोनी, डॉ. लक्षिता राठौड़, डॉ. रानू श्रीवास्तव और डॉ. आशीष सामेजा की अहम भूमिका रही। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर सर्जरी नहीं होती तो मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फिलहाल मरीज की सेहत में सुधार है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।


