जिला अस्पताल में तीन साल से नकारा पड़ा फायर फाइटिंग सिस्टम, कैसे बुझेगी आग

जिला अस्पताल में तीन साल से नकारा पड़ा फायर फाइटिंग सिस्टम, कैसे बुझेगी आग

नागौर. जिला मुख्यालय के पंडित जेएलएन राजकीय जिला अस्पताल में लाखों रुपए से लगाया गया सेंट्रल फायर फाइटिंग सिस्टम पिछले करीब तीन साल से नकारा पड़ा है। देशभर में आए दिन होटलों, अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों एवं बहुमंजिला इमारतों में आग लगने से हो रहे हादसों के बावजूद जिम्मेदार च्पैसे नहीं हैज् का बहाना बनाकर टाइमपास कर रहे हैं। वहीं जब-जब देश में आग लगने से बड़े हादसे होते हैं, राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारी अग्नि सुरक्षा जांच को लेकर फरमान जारी कर देते हैं, जिसकी कार्रवाई का डंडा निजी संस्थानों पर तो पड़ता है, लेकिन सरकारी अस्पतालों एवं अन्य कार्यालयों में कोई सुधार नहीं होता। यही हाल नागौर के जेएलएन अस्पताल का है।

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नागौर के जिला अस्पताल में यदि कहीं आग लग जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है, क्योंकि फायर फाइटिंग सिस्टम की वितरण प्रणाली में लगे पाइप, नोजल, वाल्व और सिलेंडर आदि कई जगह से गायब हो चुके हैं। अस्पताल में स्मोक डिटेक्शन सिस्टम भी नहीं लगा है, जबकि फिक्स्ड फायर फाइटिंग सिस्टम में डिटेक्शन सिस्टम रक्षा की पहली आवश्यकता होती है। इसमें हीट सेंसर, स्मोक डिटेक्टर और अलार्म आदि शामिल हैं, जो आग या धुएं की उपस्थिति का पता लगाकर सायरन बजाते हैं।

राज्य सरकार का 45 दिवसीय विशेष अभियान

शहरी क्षेत्रों में नागरिकों व पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आगजनी की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वायत्त शासन विभाग ने सभी होटलों, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट्स, मैरिज गार्डन्स, मल्टीप्लेक्स, कोचिंग संस्थानों, पेइंग गेस्ट तथा अन्य उच्च जोखिम वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों के भौतिक सत्यापन का 45 दिवसीय विशेष अभियान चलाने का निर्णय किया है। यह अभियान 6 जून 2026 से 20 जुलाई 2026 तक चलेगा। विभाग की ओर से 5 जून को जारी आदेश में समस्त नगरीय निकायों को अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले प्रतिष्ठानों का सघन सर्वेक्षण व सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य मार्गदर्शिका के अनुसार, प्रत्येक प्रतिष्ठान के पास वैध फायर एनओसी होना अनिवार्य है। जिन भवनों की एनओसी समाप्त हो चुकी है, उन्हें तुरंत नवीनीकरण के लिए पाबंद किया जाएगा। अग्नि शमन उपकरणों जैसे फायर एक्सटिंग्विशर, होज रील, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम और फायर अलार्म का चालू स्थिति में होना भी अनिवार्य है।

कहीं पाइप गायब तो कहीं वाल्व तोड़ ले गए

जेएलएन अस्तपाल में लाखों रुपए की लागत से लगाए गए सेंट्रल फायर फाइटिंग सिस्टम में लगे रबड़ व कपड़े के पाइप गायब हो चुके हैं। पाइप रखने के बॉक्स में पाइप की जगह लोगों ने पानी की खाली बोतलें व कचरा भर दिया है। कई जगह पानी खोलने के लिए लगाए गए वाल्व तक चोरी हो गए हैं।

कई बार दिया नोटिस, लेकिन सुधार नहीं

जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम काफी समय से खराब है, जिसे ठीक कराने के लिए पीएमओ को कई बार नोटिस दे चुके हैं। लेकिन पीएमओ का कहना है कि उनके पास ठीक कराने के पैसे नहीं है। सरकार के बिना फायर एनओसी के संचालन पाए जाने पर राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 एवं प्रचलित नियमों के अंतर्गत तुरंत कार्रवाई अमल में लाने के निर्देश हैं, लेकिन जिला अस्पताल होने से हम मजबूर हैं। अब सरकार को रिपोर्ट भिजवाएंगे।

– कालूराम, अग्निशमन अधिकारी, नगर परिषद, नागौर

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