Maharashtra Government Protocol Rules: महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को एक नया शासन निर्णय (GR) जारी किया है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों को अब उन जनप्रतिनिधियों के लिए अपनी कुर्सी से खड़े होने या उन्हें विशेष सम्मान देने की जरूरत नहीं होगी, जो अपराधी घोषित हो चुके हैं या किसी अदालती/विभागीय जांच के लिए सरकारी दफ्तर पहुंचे हैं।
इन स्थितियों में लागू होगा नया नियम
आपको बता दें कि अमेंडमेंट के मुताबिक, कुछ विशेष परिस्थितियों में अधिकारियों को प्रोटोकॉल का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसमें वे मामले शामिल हैं, जब कोई निर्वाचित प्रतिनिधि यानी विधायक या सांसद किसी आपराधिक या अन्य मामले में दोषी पाया गया हो। इसके अलावा यदि किसी जनप्रतिनिधि को किसी जांच या सुनवाई में पक्षकार के तौर पर बुलाया गया हो, तब भी प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा। वहीं चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं, जैसे नामांकन दाखिल करने, छंटनी या सुनवाई के लिए सरकारी कार्यालय में उपस्थित होने पर भी अधिकारियों को विशेष प्रोटोकॉल फॉलो करने की जरूरत नहीं होगी।
आम नागरिक जैसा होगा व्यवहार
मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ऐसी स्थितियों में अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ सामान्य नागरिकों की तरह व्यवहार करें। उनके लिए किसी विशेष प्रोटोकॉल का पालन करने के बजाय कानून और नियमों के दायरे में रहकर निष्पक्षता बरती जाए।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह बदलाव निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किया गया है। अधिकारी का कहना है कि जो व्यक्ति जांच का सामना कर रहा है, उसके आने पर खड़े होना या अत्यधिक शिष्टाचार दिखाना सुनवाई के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सरकारी अधिकारी पूरी तरह निष्पक्ष रहें।
पुराने नियम में क्या था?
इससे पहले 20 नवंबर, 2025 को तत्कालीन मुख्य सचिव राजेश कुमार ने निर्देश जारी किए थे, जिसमें कहा गया था कि जब भी कोई विधायक या सांसद किसी बैठक के लिए आए या वहां से जाए, तो अधिकारियों को उनके सम्मान में खड़े होकर अभिवादन करना अनिवार्य होगा। अब नए संशोधन ने इन नियमों को सीमित कर दिया है।


