अंबेडकरनगर के कसड़ा गांव में रविवार को एक मां द्वारा कथित तौर पर अपने चार बच्चों की हत्या के बाद मातम छा गया। सुबह से पसरा सन्नाटा दोपहर होते-होते चीख-पुकार में बदल गया, जब एक ही घर से चार मासूम भाई-बहनों का जनाजा निकला। पूरा गांव उमड़ पड़ा, हर चेहरा गम और अविश्वास से भरा हुआ था। सफेद कपड़ों में लिपटे शफीक, सउद, उमर और सादिया के जनाजे जब एक साथ उठे, तो पूरा गांव गमगीन हो गया। बच्चों के चाचा, चाची और अन्य रिश्तेदार जनाजे को कंधा देते हुए बार-बार टूट रहे थे। कई महिलाएं बेसुध होकर गिर पड़ीं, वहीं बुजुर्गों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कब्रिस्तान तक का रास्ता दर्द और सिसकियों से भरा था। जब चारों बच्चों के लिए एक साथ कब्रें खोदी गईं, तो वहां मौजूद हर शख्स सिहर उठा। मिट्टी की हर परत के साथ लोगों के दिल भारी होते गए। सुपुर्द-ए-खाक के वक्त पूरे गांव में गहरा शोक व्याप्त था। गांव वालों के मुताबिक ये बच्चे बेहद जिंदादिल थे। 14 वर्षीय शफीक जिम्मेदार था और अक्सर अपने पिता का हाथ बंटाने की बात करता था। 10 वर्षीय सउद और 8 वर्षीय उमर हर वक्त खेल में मस्त रहते थे। 7 वर्षीय सादिया की हंसी पूरे घर की रौनक थी। आज वही घर सूना पड़ा है। इस हृदयविदारक घटना की जड़ें शनिवार को अकबरपुर थाना क्षेत्र के मुरादाबाद मोहल्ले में हुई वारदात से जुड़ी हैं। मां गासिया खातून ने कथित तौर पर पहले बच्चों को जहर दिया और फिर ईंट से कूचकर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद वह बालकनी से कूदकर फरार हो गई। पुलिस अब तक उसके सुराग में जुटी है, लेकिन गांव में उठ रहे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।


