Mallikarjun Kharge के ‘विवादित बोल’ पर BJP का हल्लाबोल, Election Commission से हुई शिकायत।

Mallikarjun Kharge के ‘विवादित बोल’ पर BJP का हल्लाबोल, Election Commission से हुई शिकायत।
राजनीति में बयानबाजी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जहां सत्तारूढ़ दल और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। गौरतलब है कि यह शिकायत मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए दिए गए एक विवादित बयान को लेकर की गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने एक चुनावी राज्य में प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जो न केवल अनुचित है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि देश की जनता द्वारा चुने गए नेता के प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग गंभीर मामला है और इस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल किरण रिजिजू ने भी इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने की हिम्मत न करे। उन्होंने यह भी मांग की कि कांग्रेस और उसके अध्यक्ष को देश से माफी मांगने के निर्देश दिए जाएं।
बता दें कि इस प्रतिनिधिमंडल में अर्जुन राम मेघवाल और अरुण सिंह भी शामिल थे। मौजूद जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
वहीं, इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी दलों और नेताओं पर दबाव बना रहे हैं। हालांकि, बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनका आशय यह था कि प्रधानमंत्री अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर लोगों और राजनीतिक दलों को डराने का काम कर रहे हैं, न कि उन्होंने उन्हें सीधे तौर पर आतंकवादी कहा है।
गौरतलब है कि देश में इस समय कई राज्यों में चुनावी माहौल बना हुआ है और ऐसे समय में नेताओं के बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी दौर में इस तरह के बयान विवाद को बढ़ा सकते हैं और राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।

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