Women Reservation Bill पर BJP नेता दिलीप घोष की ललकार, विरोध करने वालों को देश नहीं करेगा माफ़

Women Reservation Bill पर BJP नेता दिलीप घोष की ललकार, विरोध करने वालों को देश नहीं करेगा माफ़
पश्चिम बंगाल बीजेपी नेता दिलीप घोष ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी की महिलाएँ खड़गपुर में एक रैली करेंगी, ताकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के लिए धन्यवाद दे सकें। इस अधिनियम के तहत महिला विधायकों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। खड़गपुर सदर से बीजेपी उम्मीदवार ने पत्रकारों से कहा कि हम पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहते हैं। उन्हें धन्यवाद देने के लिए आज खड़गपुर में महिलाओं द्वारा एक रैली आयोजित की जाएगी। जो लोग इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें महिलाएँ और देश कभी माफ़ नहीं करेंगे।

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उन्होंने परिसीमन बिल, 2026 का विरोध करने के लिए टीएमसी सांसद सौगत रॉय की कड़ी आलोचना की और कहा कि उन्हें दक्षिण भारत के बारे में सोचने की कोई ज़रूरत नहीं है। इसका विरोध करना महज़ राजनीति है। सौगत रॉय ने कहा कि विपक्षी पार्टियां संसद में परिसीमन के खिलाफ वोट करेंगी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। रॉय ने कहा कि हम इसके खिलाफ हैं। सभी विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। हम भी इसके खिलाफ वोट करेंगे। अभी यह साफ नहीं है कि सरकार क्या चाहती है, लेकिन यह एक गलत नीति है। इससे दक्षिण भारतीय राज्यों पर असर पड़ेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता मीनाक्षी लेखी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन लाने के लिए इसे सही समय बताया, ताकि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए दो-तिहाई आरक्षण को लागू किया जा सके।

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उन्होंने कहा, मैं महिला आरक्षण बिल पास करने के लिए प्रधानमंत्री और संसद का धन्यवाद करती हूँ। यह एकता का एक ऐतिहासिक पल है, लेकिन असली चुनौती इसे लागू करने में होगी। इतिहास गवाह है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम भूमिका के बावजूद आईएनए की ‘रानी झाँसी रेजिमेंट’ से लेकर गाँधी के सत्याग्रह तक—आज़ादी के बाद सत्ता की संरचनाओं में महिलाओं को हाशिए पर धकेल दिया गया। यह घटना लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026, और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई एक तीखी बहस के बाद सामने आई है। विपक्षी सांसदों ने संवैधानिक संशोधन को लेकर चिंता जताई, जिसके तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाना है और लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 की जानी है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून सदन में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर देगा।

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