Bihar Politics: JDU में नेतृत्व को लेकर असमंजस जारी, दो बैठकों के बाद भी सियासी सस्पेंस क्यों?

Bihar Politics: JDU में नेतृत्व को लेकर असमंजस जारी, दो बैठकों के बाद भी सियासी सस्पेंस क्यों?

Bihar Politics मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के एक सप्ताह बाद भी जनता दल यूनाइटेड (JDU) अपने विधानमंडल दल के नेता का चुनाव नहीं कर पाई है। पार्टी में विधायक दल का नया नेता कौन होगा, इस पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। इसी को लेकर सोमवार को विधानमंडल दल की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इस बैठक में भी पार्टी अपना नेता नहीं चुन सकी। इससे पहले चर्चा थी कि 14 अप्रैल को BJP के साथ JDU की भी विधानमंडल दल की बैठक होगी, जिसमें नीतीश कुमार की जगह नए नेता का चयन किया जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर JDU अपने नेता का चयन क्यों नहीं कर पा रही है।

नेता चुनने में देरी क्यों?

जदयू में विधानमंडल दल के नेता के चयन को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है, लेकिन अभी तक किसी नाम पर एकमत नहीं बन पाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह सर्वमान्य चेहरे का अभाव बताया जा रहा है। अब तक नीतीश कुमार ही विधानमंडल दल के नेता रहे हैं। उनके बाद पार्टी में दूसरी पंक्ति के नेताओं में ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव जैसे नाम सामने आते हैं। हालांकि, इन नेताओं में से किसी एक पर भी आम सहमति नहीं बन पा रही है। ललन सिंह और संजय झा सांसद हैं, जबकि विजय चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव के नाम पर भी अभी तक पूरी सहमति नहीं बन सकी है। इसी वजह से नेता के चयन में देरी हो रही है।

निशांत का इंकार

JDU विधानमंडल दल के नेता के चयन में देरी का एक बड़ा कारण निशांत को लेकर असमंजस भी बताया जा रहा है। पार्टी उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे लाने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए उन्हें डिप्टी सीएम बनाए जाने पर भी जोर दिया गया, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए, जिससे पार्टी की यह योजना फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी। सूत्रों के अनुसार, निशांत पहले पूरे बिहार का दौरा कर संगठन और सरकार के कामकाज को समझना चाहते हैं। वहीं, पार्टी नेतृत्व की अपेक्षाएं और निशांत की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। इसी कारण इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

सोशल इंजीनियरिंग के सहारे नेतृत्व चयन की तैयारी

नीतीश कुमार ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए सभी वर्गों को साधने की कोशिश की है। इसका उदाहरण यह है कि कुर्मी जाति से आने वाले किसी नेता की बजाय उन्होंने अगड़ी जाति से विजय चौधरी और पिछड़ी जाति से विजेंद्र प्रसाद यादव को डिप्टी सीएम बनाया। हालांकि, इन दोनों ही जातियों का बड़ा वोट बैंक जदयू का पारंपरिक आधार नहीं माना जाता, इसके बावजूद इन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। अब पार्टी इसी सोशल इंजीनियरिंग के संतुलन के आधार पर विधानमंडल दल के नेता का चयन करना चाहती है।

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