सिर में चोट लगने से फिल्मकार Sanjay Gupta का निधन, Sanjay Dutt बोले- ‘भाई की याद में पूरा करूंगा उनका अधूरा सपना, बनाऊंगा ‘कांटे 2’

सिर में चोट लगने से फिल्मकार Sanjay Gupta का निधन, Sanjay Dutt बोले- ‘भाई की याद में पूरा करूंगा उनका अधूरा सपना, बनाऊंगा ‘कांटे 2’

हिंदी सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। अपनी विशिष्ट एक्शन शैली, स्टाइलिश सिनेमा और सस्पेंस से भरपूर थ्रिलर फिल्मों के लिए दुनिया भर में पहचे जाने वाले मशहूर फिल्मकार संजय गुप्ता का निधन हो गया है। उनके करीबी मित्र और निर्देशक मिलाप जावेरी ने शनिवार को इस दुखद समाचार की पुष्टि की। संजय गुप्ता, जो अपने बेहतरीन विजन और जिंदादिल शख्सियत के लिए जाने जाते थे, घर पर अचानक फिसलकर गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और उनका निधन हो गया।

संजय गुप्ता के दोस्त और निर्देशक मिलाप जावेरी ने शनिवार को यह जानकारी दी। जावेरी ने बताया कि संजय घर पर फिसलकर गिर गए थे और उनके सिर में चोट लग गई थी। संजय 59 वर्ष के थे। संजय के करीबी दोस्तों में शामिल जावेरी ने कहा, ‘‘यह सच है कि उनका निधन हो गया है। वह गिर गए थे और उनके सिर में चोट लग गई थी।’’ वर्सोवा पुलिस ने इस मामले में दुर्घटनावश मौत का मामला (एडीआर) दर्ज किया है। 

वर्सोवा पुलिस थाने की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक (एसपीआई) दीपशिखा वारे ने कहा, ‘‘शुरुआती जानकारी के आधार पर हमने दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज किया है। वह राम नगर इलाके में एक बंगले में रहते थे। कोई संदिग्ध बात सामने नहीं आई है।’’ फिल्मकार अशोक पंडित सहित कई लोगों ने गुप्ता के निधन पर शोक जताया। पंडित ने संजय गुप्ता के निधन पर शोक जताते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘यह बेहद चौंकाने वाला और दुखद समाचार है। अभी खबर मिली कि हमारे प्रिय मित्र और बेहतरीन निर्देशक संजय गुप्ता अब हमारे बीच नहीं रहे। घर पर सिर में चोट लगने के कारण उनका निधन हो गया। एक और प्रतिभा असमय चली गई।’’ उन्होंने लिखा, ‘‘उनमें कहानी कहने की अद्भुत क्षमता थी, वह जिंदादिल व्यक्तित्व के धनी और फिल्म निर्माण के प्रति जुनूनी थे। हमारे फिल्म उद्योग के लिए यह बड़ी क्षति है। मेरे दोस्त, तुम्हारी कमी खलेगी। उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति संवेदनाएं। ओम शांति।’’

 गुप्ता ने 1994 में संजय दत्त, आदित्य पंचोली और रवीना टंडन अभिनीत फिल्म ‘आतिश : फील द फायर’ से निर्देशन की शुरुआत की थी। फिल्म उद्योग में वह अपराध पर आधारित फिल्मों, गैंगस्टर फिल्मों और खास शैली की एक्शन-थ्रिलर फिल्मों के लिए जाने जाते थे। उनकी फिल्मों में अक्सर मुंबई के अंडरवर्ल्ड, अपराध और बदले की कहानियां दिखाई देती थीं। उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में अमिताभ बच्चन और संजय दत्त अभिनीत ‘कांटे’ (2002), ‘मुसाफिर’ (2004), ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ (2007) और ‘शूटआउट एट वडाला’ (2013) शामिल हैं। ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ का निर्माण और सह-लेखन भी उन्होंने किया था। 

उन्होंने संजय दत्त और जॉन अब्राहम के साथ कई फिल्मों में काम किया। उनकी अन्य फिल्मों में ‘जिंदा’ (2006), ‘जज्बा’ (2015), ऋतिक रोशन अभिनीत ‘काबिल’ (2017) और जॉन अब्राहम तथा इमरान हाशमी अभिनीत ‘मुंबई सागा’ (2021) शामिल हैं। अपने प्रोडक्शन बैनर ‘व्हाइट फेदर फिल्म्स’ के माध्यम से उन्होंने ‘दस कहानियां’ (2007) जैसी फिल्मों का निर्माण भी किया था। काजोल, रवीना टंडन और संजय दत्त सहित कई कलाकारों ने फिल्मकार संजय गुप्ता को याद करते हुए उन्हें ‘जिंदादिल फिल्मकार’ बताया। काजोल ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्मकार की एक तस्वीर साझा की और उनके निधन की खबर को ‘‘दिल तोड़ने वाली’’ बताया। काजोल ने लिखा, ‘‘दुख की इस घड़ी में उनके परिवार को प्यार और अपार शक्ति मिले। उनकी आत्मा को शांति मिले।’’ 

संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर फिल्मकार के साथ अपनी कई तस्वीरें साझा कीं। दोनों ने ‘आतिश : फील द फायर’ और ‘कांटे’ सहित कई फिल्मों में साथ काम किया था। दत्त ने लिखा, ‘‘गुप्ता, मेरे भाई। मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि तुम चले गए। हमने साथ में बहुत कुछ साझा किया है, ढेर सारी यादें और दोस्ती के कई साल। तुम हमेशा मेरे परिवार का हिस्सा रहे हो और यह कभी नहीं बदलेगा।’’ 

दत्त ने फिल्मकार के साथ ‘कांटे 2’ को लेकर हुई बातचीत को याद करते हुए कहा कि वह उनकी याद में यह फिल्म बनाएंगे। अभिनेता ने लिखा, ‘‘मुझे तुम्हारी, हमारी बातचीत और साथ बिताए सभी पलों की कमी खलेगी। हम हाल ही में ‘कांटे 2’ के बारे में बात कर रहे थे। मैं तुम्हारे सपने को पूरा करने के लिए ‘कांटे 2’ बनाऊंगा। अपने भाई की याद में इस सपने को सच करने के लिए मैं सब कुछ करूंगा। तुमसे हमेशा प्यार रहेगा। तुम्हारे बिना जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी, भाई।’’ रवीना टंडन ने लिखा, ‘‘प्रिय गुप्ता के असमय निधन की चौंकाने वाली खबर सुनकर स्तब्ध हूं। बेहद दुखी हूं।’’ अभिनेता अनुपम खेर ने गुप्ता को ‘‘अपनी अलग पहचान रखने वाली शैली और सिनेमा के प्रति अपार प्रेम रखने वाला फिल्मकार’’ बताया।

संजय गुप्ता का इस तरह अचानक चले जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी अनोखी फिल्में और उनका सिनेमैटिक विजन हमेशा सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा रहेगा।

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