एसएन मेडिकल कॉलेज में अब एक बार में दो मरीजों के गुर्दा प्रत्यारोपण किए जाएंगे। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने इसकी तैयारी की है। नवंबर में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ की टीम आगरा आएगी। टीम के निर्देशन में अगले चार से पांच गुर्दा प्रत्यारोपण और किए जाएंगे। इसके बाद एसएन मेडिकल कॉलेज की टीम खुद नियमित रूप से गुर्दा प्रत्यारोपण करेगी। अभी तक यहां तीन मरीजों के गुर्दा प्रत्यारोपण हो चुके हैं। आयुष्मान और राशन कार्ड धारकों को असाध्य रोग निधि के तहत यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2025 से गुर्दा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया चल रही है। एसजीपीजीआई, लखनऊ की टीम के निर्देशन में 22 अगस्त को सिकंदरा निवासी 32 वर्षीय महेंद्र का पहला गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया था। इसके बाद 10 अक्टूबर को दूसरा और 23 अक्टूबर को तीसरा गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया। तीनों मरीजों और उन्हें गुर्दा दान करने वाले स्वजन की जांच से लेकर प्रत्यारोपण तक की प्रक्रिया निशुल्क की गई। नवंबर में आएगी लखनऊ की टीम एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि नवंबर में एसजीपीजीआई, लखनऊ की टीम आगरा आएगी। टीम के निर्देशन में एक बार में दो मरीजों के गुर्दा प्रत्यारोपण किए जाएंगे। लखनऊ की टीम अभी चार से पांच और प्रत्यारोपण कराएगी। इसके बाद एसएन मेडिकल कॉलेज की टीम अपने स्तर पर नियमित रूप से गुर्दा प्रत्यारोपण करेगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम होगी। आगरा के साथ आसपास के जिलों के मरीज भी पहुंच रहे एसएन मेडिकल कॉलेज में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने के बाद आगरा के साथ मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, हाथरस, अलीगढ़ और भरतपुर के मरीज भी यहां पहुंच रहे हैं। गुर्दा रोगी प्रत्यारोपण के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में संपर्क कर रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अब एक बार में दो प्रत्यारोपण करने की तैयारी की गई है। ऐसे होती है प्रत्यारोपण की प्रक्रिया गुर्दा खराब होने पर डायलिसिस करा रहे मरीज एसएन की ओपीडी में पंजीकरण करा सकते हैं। इसके बाद मरीज और गुर्दा दान करने वाले स्वजन की जांच की जाती है। एसएन का पैनल दोनों के दस्तावेजों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर अनुमति देता है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के पैनल से स्वीकृति ली जाती है। मरीज और गुर्दा दान करने वाले स्वजन का पुलिस से सत्यापन भी कराया जाता है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रत्यारोपण किया जाता है।

