BJP Shiv Sena Dispute: महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में खींचतान बढ़ गई है। पांच में से तीन सीटें विपक्षी महाविकास अघाड़ी के जीतने के बाद भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। भाजपा ने शिवसेना पर अपने उम्मीदवारों का साथ नहीं देने की बात कही है, तो शिवसेना ने भाजपा को सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की नसीहत दी है। इस बीच मामला तब और बढ़ गया, जब शिवसेना नेता निलेश राणे ने भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन को एकनाथ शिंदे के बारे में बयान देते समय अपनी सीमा में रहने की चेतावनी दे दी। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दोनों दलों के बीच मतभेद स्वीकार करते हुए कहा है कि इन्हें बातचीत से दूर कर लिया जाएगा।
आठवले ने कहा कि राजनीति में एक-दूसरे पर आरोप लगाना आम बात है। महायुति हो या विपक्षी महाविकास अघाड़ी, दोनों तरफ के नेता आरोप-प्रत्यारोप करते रहते हैं। उन्होंने माना कि चुनाव में सीटें गंवाने के बाद भाजपा और शिवसेना के बीच कुछ मतभेद सामने आए हैं, लेकिन गठबंधन में कोई बड़ी परेशानी नहीं है। दोनों दल मिलकर इन मतभेदों को सुलझा लेंगे।
पांच में से तीन सीटें विपक्ष के खाते में गईं
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। 28 अक्टूबर को आए नतीजों में महाविकास अघाड़ी ने तीन सीटें जीत लीं, जबकि महायुति को दो सीटें मिलीं। भाजपा ने पुणे शिक्षक सीट और शिंदे की शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने नागपुर स्नातक सीट और शरद पवार की एनसीपी ने पुणे तथा छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीटें जीतीं। अजित पवार की एनसीपी को एक भी सीट नहीं मिली।
नतीजों के बाद भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने पुणे और नागपुर में भाजपा उम्मीदवारों का पूरा साथ नहीं दिया। उनका कहना था कि सहयोगी दलों ने मिलकर काम किया होता तो नतीजे बेहतर हो सकते थे। भाजपा नेताओं ने शिवसेना के कुछ नेताओं पर गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने के आरोप भी लगाए।
शिंदे पर बयान से नाराज हुए शिवसेना नेता
भाजपा प्रवक्ता के आरोपों पर शिवसेना नेता निलेश राणे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नवनाथ बन को चेतावनी देते हुए कहा था कि एकनाथ शिंदे के बारे में बोलते समय अपनी सीमा में रहें। राणे ने आरोप लगाया कि बन अपनी हद से आगे बढ़कर बयान दे रहे हैं। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच चल रही खींचतान और चर्चा में आ गई।
शिवसेना की ओर से भाजपा को यह भी नसीहत दी गई कि वह गठबंधन के सहयोगी दलों को हल्के में न ले। वहीं, भाजपा नेता चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा करने की बात कह रहे हैं। महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने भी कहा है कि पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी।
आठवले ने संभालने की कोशिश की
महायुति में बढ़ती बयानबाजी के बीच रामदास आठवले ने मतभेद दूर होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव के बाद भाजपा और शिवसेना के बीच कुछ अंतर जरूर आया है, लेकिन इसे बड़ा विवाद नहीं मानना चाहिए। अब देखना होगा कि गठबंधन के नेता आपसी शिकायतों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

