5 दिनों से हड़ताल पर डॉक्टर, 15 हजार मरीज इलाज से वंचित

5 दिनों से हड़ताल पर डॉक्टर, 15 हजार मरीज इलाज से वंचित

भास्कर न्यूज | बक्सर जिले में मौसम जनित वायरल बीमारियां पैर पसार रही है। लोग सर्दी खांसी बुखार से पीड़ित हो रहे हैं, इसी बीच जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से यह परेशानी बढ़ गई है। सबसे अधिक परेशानी गरीब मजदूर वर्ग मध्यम वर्ग के लोगों को उठानी पड़ रही है, क्योंकि यह वैसे वर्ग के लोग हैं जिन्हें अपने इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन पिछले 5 दिनों से डॉक्टरों के अनिश्चितकालीन हड़ताल से ऐसे लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। ऐसे लोगों को यह चिंता सता रही है की रोजी-रोटी के लिए पैसा इकट्ठा करें या इलाज में पैसा लगाएं क्योंकि सदर अस्पताल समेत जिले के सभी प्रखंडों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी सेवा बंद है, और कब तक बंद रहेगी यह हड़ताल कब तक चलेगा इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर बक्सर जिला इकाई के डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल 24 सितंबर से शुरू किया है। 5 दिन में सदर अस्पताल में 3500 मरीज प्रभावित: बताया जाता है कि बक्सर सदर अस्पताल में पिछले 5 दिनों से ओपीडी सेवा बंद है। प्रतिदिन 600 से 750 मरीज का इलाज किया जाता है। पिछले 5 दिनों से ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण लगभग 3500 मरीज अब तक इलाज से वंचित हो चुके हैं। इसके साथ हीं डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल की बात करें तो प्रतिदिन 300 से 350 मरीज का रजिस्ट्रेशन होता है लेकिन यहां भी पिछले 5 दिनों से ओपीडी सेवा बंद है ऐसे में डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में लगभग 1500 मरीज का इलाज प्रभावित हुआ है। और पूरी तरह से इन मरीजों को एक गोली भी सरकारी नहीं मिल सकी है। इतना ही नहीं जिले के 11 प्रखंडों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। डाक्टरों की हड़ताल के कारण के बीच आपातकालिन सेवा सुचारू रूप से चल रही है। लेकिन डॉक्टरों पर दबाव का बोझ साफ-साफ देखा जा सकता है। चौगाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी ओपीडी सेवा ठप है। अस्पताल प्रशासन की ओर से आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखने का प्रयास किया गया। ओपीडी बंद रहने से सामान्य बीमारी का इलाज कराने पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। चौगाईं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन सेवा में मौजूद डा जितेंद्र कुमार तैनात है। डॉक्टर की हड़ताल के कारण 24 घंटा 1 ही डॉक्टर मौजूद है। जबकि हड़ताल के तीसरे दिन डाक्टर पंकज कुमार ने 24 घंटे आपातकालीन सेवा दिया। वही चौगाईं सीएचसी में इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉ जितेंद्र कुमार ने बताया की बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर ओपीडी ठप है। निजी अस्पताल व क्लिनिक मरीजों का सहारा निजी अस्पताल व क्लिनिक छोटी बड़ी बीमारियों को लेकर मरीजों के सहारा बन रहा है। हालांकि रोगियों की अनगिनत बीमारी व परेशानी के आगे इस तरह के क्लिनिक भी कम पड़ जा रहे हैं। जिससे आमजनों को मामूली बीमारी के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। भास्कर न्यूज | बक्सर जिले में मौसम जनित वायरल बीमारियां पैर पसार रही है। लोग सर्दी खांसी बुखार से पीड़ित हो रहे हैं, इसी बीच जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से यह परेशानी बढ़ गई है। सबसे अधिक परेशानी गरीब मजदूर वर्ग मध्यम वर्ग के लोगों को उठानी पड़ रही है, क्योंकि यह वैसे वर्ग के लोग हैं जिन्हें अपने इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन पिछले 5 दिनों से डॉक्टरों के अनिश्चितकालीन हड़ताल से ऐसे लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। ऐसे लोगों को यह चिंता सता रही है की रोजी-रोटी के लिए पैसा इकट्ठा करें या इलाज में पैसा लगाएं क्योंकि सदर अस्पताल समेत जिले के सभी प्रखंडों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी सेवा बंद है, और कब तक बंद रहेगी यह हड़ताल कब तक चलेगा इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर बक्सर जिला इकाई के डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल 24 सितंबर से शुरू किया है। 5 दिन में सदर अस्पताल में 3500 मरीज प्रभावित: बताया जाता है कि बक्सर सदर अस्पताल में पिछले 5 दिनों से ओपीडी सेवा बंद है। प्रतिदिन 600 से 750 मरीज का इलाज किया जाता है। पिछले 5 दिनों से ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण लगभग 3500 मरीज अब तक इलाज से वंचित हो चुके हैं। इसके साथ हीं डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल की बात करें तो प्रतिदिन 300 से 350 मरीज का रजिस्ट्रेशन होता है लेकिन यहां भी पिछले 5 दिनों से ओपीडी सेवा बंद है ऐसे में डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल में लगभग 1500 मरीज का इलाज प्रभावित हुआ है। और पूरी तरह से इन मरीजों को एक गोली भी सरकारी नहीं मिल सकी है। इतना ही नहीं जिले के 11 प्रखंडों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। डाक्टरों की हड़ताल के कारण के बीच आपातकालिन सेवा सुचारू रूप से चल रही है। लेकिन डॉक्टरों पर दबाव का बोझ साफ-साफ देखा जा सकता है। चौगाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी ओपीडी सेवा ठप है। अस्पताल प्रशासन की ओर से आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखने का प्रयास किया गया। ओपीडी बंद रहने से सामान्य बीमारी का इलाज कराने पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। चौगाईं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन सेवा में मौजूद डा जितेंद्र कुमार तैनात है। डॉक्टर की हड़ताल के कारण 24 घंटा 1 ही डॉक्टर मौजूद है। जबकि हड़ताल के तीसरे दिन डाक्टर पंकज कुमार ने 24 घंटे आपातकालीन सेवा दिया। वही चौगाईं सीएचसी में इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉ जितेंद्र कुमार ने बताया की बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर ओपीडी ठप है। निजी अस्पताल व क्लिनिक मरीजों का सहारा निजी अस्पताल व क्लिनिक छोटी बड़ी बीमारियों को लेकर मरीजों के सहारा बन रहा है। हालांकि रोगियों की अनगिनत बीमारी व परेशानी के आगे इस तरह के क्लिनिक भी कम पड़ जा रहे हैं। जिससे आमजनों को मामूली बीमारी के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।  

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