राजकीय और प्रशासनिक स्तर पर मानसून की विदाई के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ ने बीकानेर जिले में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। रविवार को अचानक बदले मौसम के मिजाज और झमाझम बारिश ने एक बार फिर शहर की पोल खोल कर रख दी है। इस सीजन में मानसून के दौरान जहां अधिकतम 24 घंटे में सर्वाधिक 54 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, वहीं पोस्ट-मानसून के इस दौर में 37 एमएम बारिश हुई। जिले में इस दौरान सर्वाधिक बारिश श्रीडूंगरगढ़ में 62 मिलीमीटर दर्ज की गई। जिले में सबसे अधिक 62 एमएम बारिश श्रीडूंगरगढ़ तहसील में रिकॉर्ड की गई। भारी बारिश के चलते शहर के निचले हिस्सों और कई रिहायशी इलाकों में पानी जमा हो गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। वहीं, जिला मुख्यालय पर भी रविवार रात हुई इस तेज बारिश ने नगर निगम और प्रशासन के दावों की हवा निकाल दी। रविवार रात से शुरू हुई बारिश का असर सोमवार सुबह तक साफ नजर आया। शहर के प्रमुख मार्गों और निचले इलाकों में जलभराव के कारण हालात बद से बदतर हो गए। नगर निगम के आगे मुख्य मार्ग से लेकर पुरानी गिन्नाणी और व्यस्त गजनेर रोड तक सड़कों के किनारे पानी जमा हो गया। सबसे खराब स्थिति पुरानी गिन्नाणी क्षेत्र की रही, जहां जलभराव के कारण दलदल जैसे हालात बन गए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि नगर निगम के आगे जमा पानी को निकालने के लिए मशीनों (पंपों) का सहारा लेना पड़ा। सोमवार को दिन में आंधी के हालात बने मगर तेज हवाएं ही चलीं। इस तंत्र के गुजरने के बाद मंगलवार से आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा। बारिश के थमने के बाद दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।

