सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें लगभग 804 करोड़ रुपये वाले चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को चलाने की अनुमति मांगी गई थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने कहा कि वे कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने के पक्ष में नहीं हैं, जिसने याचिका को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
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कोर्ट ने क्या कहा?
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह इस मामले पर जल्द से जल्द फैसला करे। सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज़ कर दिया है, जबकि चार बैंक खातों में मौजूद फंड का हकदार कौन है, यह बड़ा सवाल अभी भी विचाराधीन है। बेंच ने कहा, “हम मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रहे हैं। हम अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने के इच्छुक नहीं हैं। हम हाई कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह सुनवाई में तेज़ी लाए। इस याचिका में विधायक विश्वनाथ दास की साइबर अपराध की शिकायत के बाद पार्टी के चार बैंक खातों को फ्रीज़ करने के पश्चिम बंगाल पुलिस के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट को उन चार बैंक खातों (जिनसे डेबिट की सुविधा फ्रीज़ कर दी गई थी और जिनमें लगभग 804 करोड़ रुपये थे) को संचालित करने की अनुमति देने वाला अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी राहत देने से उसका पहले का आदेश कमज़ोर हो जाएगा, जिसमें राजनीतिक पार्टी को अपने रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा करने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद मामले की फिर से सुनवाई होगी, और उससे पहले सभी पक्ष अपनी-अपनी स्थिति बताते हुए हलफनामा दाखिल करेंगे। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि चार खातों के संचालन की अनुमति देने वाला कोई और आदेश पारित करने से उनका पिछला आदेश “गलत” साबित हो जाएगा। TMC ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मौजूद उन चार खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी, और दावा किया था कि खातों को फ्रीज़ करने से संबंधित FIR में कमियां थीं।

