सहारनपुर में हुदा जरीवाला तारीख पर पहुंची:मस्जिद ध्वस्तीकरण पर सीएम–डीएम को क्रिमिनल कहने पर हुई थी अरेस्ट, बोली;उनके बयानों को अलग-अलग तरीके से पेश किया

सहारनपुर में हुदा जरीवाला तारीख पर पहुंची:मस्जिद ध्वस्तीकरण पर सीएम–डीएम को क्रिमिनल कहने पर हुई थी अरेस्ट, बोली;उनके बयानों को अलग-अलग तरीके से पेश किया

सहारनपुर में पूर्व पत्रकार और आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता हुदा जरीवाला गुरुवार को अपने अधिवक्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। 17 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपने मामले की तारीख पर पेश होने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में 9 सितंबर की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। जरीवाला ने दावा किया कि उन्हें सहारनपुर के सर्किट हाउस से उठाया गया और दो रात जेल में रखा गया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को गैर-संवैधानिक बताया। जरीवाला ने कहा कि उन्हें धारा 151 के तहत हिरासत में लिया गया था। उन्होंने कहा कि इस धारा में जमानत बांड प्रस्तुत करने की व्यवस्था होने के बावजूद उनसे बेल बॉन्ड नहीं लिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका मोबाइल फोन भी ले लिया गया। जरीवाला के मुताबिक, बाद में सहारनपुर, मुरादाबाद और दिल्ली के अधिवक्ताओं ने कानूनी मदद की और 11 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट से उन्हें जमानत मिली। जरीवाला की गिरफ्तारी के समय सामने आई खबरों में पुलिस कार्रवाई को सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जोड़ा गया था। ‘योगी और डीएम को क्रिमिनल कहना मेरा बयान’ मीडिया से बातचीत में जरीवाला ने अपने पुराने बयान पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल्ली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के डीएम अरविंद चौहान को क्रिमिनल कहा था। उनका कहना था कि कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई को वह ‘क्रिमिनल एक्टिविटी’ मानती हैं। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। जरीवाला ने कहा कि वह मस्जिद प्रकरण को लेकर अपनी आवाज उठाने सहारनपुर पहुंची थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयानों को अलग-अलग तरीके से पेश किया गया। वहीं, उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में भी उनके खिलाफ कार्रवाई को मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जोड़ा गया है। धारा 299 में मुकदमे पर भी सवाल जरीवाला ने अधिवक्ता विशांत सिंह की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में धारा 299 लगाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि इस धारा के तहत मुकदमा किस आधार पर दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि मामले में उनकी पहली तारीख 17 सितंबर को थी और वह कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत और देश की न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। वह कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखेंगी और मामले की लड़ाई कोर्ट में जारी रखेंगी। वकीलों का जताया आभार कलेक्ट्रेट में जरीवाला ने अपने समर्थन में खड़े अधिवक्ताओं का भी आभार जताया। उन्होंने अधिवक्ता मोसा खान, सोनू पठान, दिल्ली के अधिवक्ता महमूद प्राचा, नदीम समेत अन्य अधिवक्ताओं और समर्थकों को धन्यवाद दिया। उनका कहना था कि संविधान में विश्वास रखने वाले अधिवक्ताओं ने मुश्किल समय में उनका साथ दिया।

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