अच्छी बारिश के बाद बिलासपुर संभाग के ज्यादातर बड़े, मध्यम और छोटे जलाशय पर्याप्त पानी से भर गए हैं। इसका असर खेती पर भी नजर आ रहा है। धान की फसलें अच्छी स्थिति में हैं और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। संभाग आयुक्त सुनील जैन की अध्यक्षता में सोमवार को संभाग स्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक हुई, जिसमें जलाशयों के जलस्तर, फसलों की स्थिति और खाद-बीज की उपलब्धता की समीक्षा की गई। खारंग और मनियारी जलाशय में 104% पानी बैठक में बताया गया कि संभाग के बड़े, मध्यम और छोटे जलाशयों में रोजमर्रा की जरूरत और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना में 95 प्रतिशत, जबकि खारंग और मनियारी जलाशय में 104-104 प्रतिशत पानी भरा है। वहीं अरपा-भैंसाझार निर्माणाधीन बैराज में 26% और केलो निर्माणाधीन परियोजना में 44.58 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। मध्यम परियोजनाओं में घोंघा जलाशय में 102 प्रतिशत, केदार में 101 प्रतिशत, पुटका में 100 प्रतिशत, किंकारी में 101 प्रतिशत और खम्हार पाकुट में 101 प्रतिशत पानी भरा हुआ है। 8 जिलों में 751043 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता संभाग में 5 बड़ी, 6 मध्यम, 768 छोटी और 10 नलकूप योजनाएं हैं। इन सभी योजनाओं से कुल 751043 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। बैठक में रबी सिंचाई वर्ष 2025-26 की उपलब्धि और खरीफ सिंचाई वर्ष 2026-27 के लक्ष्य की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि पर्याप्त बारिश के कारण खरीफ की खेती सुचारु रूप से चल रही है। कहीं से पानी छोड़ने की मांग नहीं आई संभाग स्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक में अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल जलाशयों में पर्याप्त पानी है। बैठक के दौरान कहीं से भी अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग नहीं आई। बैठक में डिप्टी कमिश्नर डॉ. स्मृति तिवारी और हरिशंकर चौहान समेत संभाग के विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने गांववार बनेगी योजना संभाग आयुक्त सुनील जैन ने दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव की स्थानीय जरूरत और कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने किसानों के बीच दलहन-तिलहन की खेती के फायदे को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए, ताकि सिंचाई के बेहतर उपयोग के साथ फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल सके। बैठक में खाद और बीज की उपलब्धता तथा किसानों तक इनके वितरण की स्थिति की भी जानकारी ली गई।

