गोमतीनगर के नेहरू एन्क्लेव में आवारा पशुओं के लगातार आने से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने एलडीए को बाउंड्रीवाल बनाने की मांग पर चार सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इसके लिए स्थानीय निवासियों को पहले एलडीए के सामने आवेदन देने को कहा गया है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की बेंच ने शिव सिंह चौहान समेत 12 निवासियों की याचिका पर यह आदेश दिया। याचियों ने कोर्ट को बताया कि एलडीए की योजना के ब्रोशर में आवासीय परिसर के आसपास बाउंड्रीवाल बनाने का भरोसा दिलाया गया था। इसके बावजूद अब तक बाउंड्रीवाल नहीं बनाई गई है। खुले परिसर में आवारा पशुओं के आने से खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है। फेंसिंग का क्षेत्र निश्चित नहीं, इसलिए रोक लगाई याचियों ने अपने स्तर पर फेंसिंग कराने की इजाजत भी मांगी थी। इसका विरोध करते हुए एलडीए समेत दूसरे पक्षों ने कहा कि जिस जगह पर फेंसिंग की मांग की गई है, वह साझा जगह है। इसका इस्तेमाल अलग-अलग मंजिलों पर रहने वाले सभी लोग करते हैं। ऐसे में कुछ निवासियों को फेंसिंग की इजाजत देने से दूसरे लोगों के साझा क्षेत्र के इस्तेमाल के अधिकार पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि याची यह साफ नहीं कर सके कि प्रस्तावित फेंसिंग केवल उनके आवंटित क्षेत्र तक ही रहेगी। ऐसे में इस स्तर पर व्यक्तिगत रूप से फेंसिंग करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने आवारा पशुओं से होने वाले खतरे को अनदेखा नहीं किया। कोर्ट ने माना कि बाउंड्रीवाल न होने से आवारा पशुओं का परिसर में आना बच्चों और बुजुर्गों के लिए असली खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए सभी निवासियों को एलडीए के सामने बाउंड्रीवाल बनाने का मुद्दा उठाने की छूट दी गई। कोर्ट ने कहा कि चार से छह फ्लैट वाले हर आवासीय परिसर में बाउंड्रीवाल बनाने का प्रस्ताव तभी आगे बढ़ेगा, जब संबंधित सभी लोगों की सहमति हो।

