Jabalpur News : मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में बिना पात्रता के 5 प्रतिशत बोनस अंक हासिल करने के मामले में जबलपुर में स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए मामले में 13,089 पूर्व चयनित प्राथमिक शिक्षकों की सभी रिक्त अपीलों को खारिज कर दिया है।
कपट से प्राप्त लाभ मान्य नहीं
डिवीजन बेंच ने ये स्पष्ट किया कि, गलत जानकारी देकर चयन सूची में आए लोग बाद में समानता के सिद्धांत पर राहत नहीं मांग सकते हैं। इससे ईमानदारी से प्रक्रिया पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन होता है। बिना भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) की मान्यता के बोनस अंक पाना सीधे तौर पर कूटरचना और धोखाधड़ी है। विधि का सर्वमान्य सिद्धांत है कि, धोखाधड़ी से हासिल किया गया कोई भी अधिकार या चयन स्वतः निरस्त हो जाता है। कोर्ट ने महेश कुमार बाथम बनाम एलआईसी मामले का संदर्भ दिया।
बार-बार मिले अवसरों को गंवाया
कोर्ट ने पाया कि, अभ्यर्थियों को 25 अगस्त 2025 से 11 फरवरी 2026 के बीच तीन अलग – अलग अवसरों पर सुधार की छूट दी गई थी। परिणाम आने के बाद इसे भूलवश बताना और केवल वास्तविक अंकों के आधार पर मेरिट में बने रहने की मांग करना नियम विरुद्ध है। डिवीजन बेंच के फैसले के बाद अब एकलपीठ का मूल आदेश लागू होगा। इसके तहत चयन मंडल आरसीआई डिप्लोमाधारकों के लिए 15 दिनों की विशेष विंडो खोलेगा, ताकि पात्र अभ्यर्थी प्रमाण-पत्र अपलोड कर सकें।
ऐसे अभ्यार्थियों के आवेदन निरस्त होंगे
ऐसे में जो अभ्यर्थी वैध प्रमाण – पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहेंगे, उनका आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। सम्पूर्ण सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर तीन माह के भीतर नई संशोधित मेरिट सूची जारी कर नियुक्तियां दी जाएंगी।

