Rajasthan: राजस्थान के 338 गावों के किसानों को मिलेगा तोहफा, अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना पर खर्च होंगे 2500 करोड़

Rajasthan: राजस्थान के 338 गावों के किसानों को मिलेगा तोहफा, अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना पर खर्च होंगे 2500 करोड़

जयपुर। राज्य सरकार की ओर से ‘अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना’ को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए युद्धस्तर पर कार्य कराए जा रहे हैं। वागड़ अंचल के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही यह परियोजना जनजाति बहुल क्षेत्र में कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी। लगभग 2 हजार 500 करोड़ रुपए लागत की इस परियोजना से बांसवाड़ा जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों बांसवाड़ा, बागीदौरा और कुशलगढ़ की छह तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी और गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली से जल उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना से लगभग 3.5 लाख आबादी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी।

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102 किमी मुख्य नहर लंबाई, 22.50 किमी सुरंगें

परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से नहर नेटवर्क और विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना की कुल मुख्य नहर लंबाई 102 किलोमीटर है। इसमें 22.50 किलोमीटर लंबाई में सुरंगें, कट एंड कवर संरचनाएं, एक्वाडक्ट तथा नदी पार करने के लिए साइफन का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही लगभग 230 अन्य महत्वपूर्ण नहरी संरचनाएं, जैसे सुपरपासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर भी परियोजना का हिस्सा हैं।

प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र होगा विकसित

परियोजना के तहत अत्याधुनिक प्रेशर प्रणाली आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इससे खेतों तक वैज्ञानिक और नियंत्रित सिंचाई स्काडा प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित की जा सकेगी। सिंचित क्षेत्र में प्रत्येक 200 हेक्टेयर के चक स्तर पर लगभग 200 डिग्गियों का निर्माण प्रस्तावित है। मुख्य नहर प्रणाली से इन डिग्गियों तक पानी एमएस और डीआई पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। इसके बाद डिग्गियों से लगभग 5 हजार किलोमीटर लंबाई का भूमिगत एचडीपीई पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली के जरिए खेतों तक पानी पहुंचेगा।

इस आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक 1.25 से 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट विकसित किए जाएंगे। इन हाइड्रेंट पॉइंट्स तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जाएगा, जहां से किसान सीधे सिंचाई के लिए जल प्राप्त कर सकेंगे। इस प्रणाली से खेत स्तर तक समान जल वितरण, न्यूनतम जल हानि और अधिक दक्ष सिंचाई सुनिश्चित होगी। आधुनिक माइक्रो एवं प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली के जरिए कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो सकेगी। किसानों को निरंतर बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

स्काडा प्रणाली से ऑटोमाइज होगी मॉनिटरिंग

परियोजना में अत्याधुनिक स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) प्रणाली भी विकसित की जा रही है। इससे संपूर्ण प्रेशर प्रणाली आधारित तंत्र का संचालन और मॉनिटरिंग पूरी तरह ऑटोमाइज्ड होगी। इस प्रणाली के माध्यम से जल वितरण को समान रूप से सुनिश्चित करने, दबाव एवं प्रवाह को स्वचालित रूप से नियंत्रित करने तथा रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग और संचालन नियंत्रण की सुविधा उपलब्ध होगी।

इस प्रणाली से पंपिंग स्टेशन, रिलीफ वाल्व, हाइड्रेंट और विभिन्न शाखाओं में जल प्रवाह की सतत निगरानी संभव होगी। वर्तमान में नहर के 42 किलोमीटर हिस्से में कार्य किया जा रहा है। इनटेक स्ट्रक्चर और स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। टनल कार्य, एक्वाडक्ट, साइफन, कट एंड कवर संरचनाओं के साथ नहर से डिग्गियों तक भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण भी विभिन्न स्थानों पर निरंतर जारी है।

नियमित मॉनिटरिंग से मिली गति

परियोजना की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा रही है। समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से कार्य पूर्ण करने के लिए निर्माण एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हेक्टेयर निजी भूमि का नियमानुसार अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 47 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित किए जा चुके हैं। लगभग 15 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है। शेष भूमि अधिग्रहण और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रियाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

सिंचाई के लिए वर्षभर मिलेगा जल

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि आगामी वर्षों में यह परियोजना बांसवाड़ा जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में शामिल होगी। इसके पूर्ण होने के बाद क्षेत्र के किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही भू-जल स्तर में सुधार, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना वागड़ क्षेत्र के जनजाति बहुल इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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