एमपी में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच 20 मंत्रियों की पेशी, सत्ता- संगठन ने किया तलब

एमपी में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच 20 मंत्रियों की पेशी, सत्ता- संगठन ने किया तलब

MP BJP- एमपी में बीजेपी की मोहन यादव सरकार के मंत्रियों के कामकाज की वन-टू-वन समीक्षा की जा रही है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल समेत 20 मंत्रियों ने रविवार को विभाग और प्रभार के जिलों का रिपोर्ट कार्ड सत्ता- संगठन के सामने पेश किया। सबसे पहले शुक्ल ने अपना लेखा- जोखा पेश किया। बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, सीएम डॉ. मोहन यादव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 60 सवालों में से खासकर प्रभार के जिलों में किए दौरे, रात्रि विश्राम आदि के बारे में पूछा। राज्य के बाकी मंत्रियों की ‘पेशी’ सोमवार को होगी। बता दें कि प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार संभावित है जिसमें समीक्षा बैठक में सामने आई मंत्रियों की रिपोर्ट को आधार बनाया जा सकता है। हालांकि प्रदेश संगठन इससे इंकार कर रहा है।

मंत्रियों की समीक्षा के दौरान सत्ता और संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे पिछले चुनावों में बीजेपी की हारी सीटों व बूथों को आगामी चुनावों में जीतने के प्लान समेत जनता के लिए विभागीय नवाचारों की जानकारी ली। कई मंत्रियों को संगठन ने हिदायतों के साथ जनता से जुड़े रहने की सीख दी। कुछ के काम सराहे भी।

राजेंद्र शुक्ल को तय से ज्यादा समय लगा, कुछ मंत्रियों ने शिकायतें भी कीं

हर मंत्री के लिए 15 मिनट तय किए गए थे। बताते हैं, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को सबसे ज्यादा समय लगा। दूसरे नंबर पर मंत्री विजय शाह की 20 मिनट तक पेशी हुई। इसके बाद इंदर सिंह परमार, प्रहलाद पटेल, उदय प्रताप सिंह, गौतम टेटवाल, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, कैलाश विजयवर्गीय, निर्मला भूरिया, लखन पटेल, दिलीप जायसवाल, मंत्री नारायण सिंह पंवार समेत 20 मंत्रियों ने उपलब्धियां गिनाईं। कई मंत्रियों ने अपनी शिकवा-शिकायतें भी खुलकर रखीं।

मंत्रिमंडल विस्तार में आधार

1- संगठन की ओर से मना करने के बावजूद इस कवायद को मंत्रिमंडल विस्तार के समय आधार बनाया जा सकता है। मंत्रिमंडल में विस्तार जल्द संभावित है।

2- कांग्रेस हावी है। अगले साल स्थानीय चुनाव हैं। कई मंत्रियों में नाराजगी हैं। केंद्र की टीमें मप्र के माहौल को समझ रही हैं, इसलिए गुजरात से मिला-जुला पैटर्न मप्र में अपनाया जा सकता है।

संगठन ने मंत्रियों से पूछा-

प्रभार के जिलों में कितने दौरे, रात्रि विश्राम, बैठकें, जनसंवाद किए?

जिन सीटों-बूथों पर पार्टी हारी, वहां जीत के लिए क्या किया?

नाराज जनप्रतिनिधियों से कैसे संवाद बढ़ा रहे?

जनता से जुड़़े रहने के क्या किए, कार्यकर्ता की दिक्कतें कैसे दूर कर रहे?

बड़ी घटनाएं टालने को क्या किया, क्या भूमिका रही?

गेहूं खरीदी जैसे विषयों पर विपक्ष के झूठे दावे कैसे खरिज किए?

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