कांग्रेस ने सोमवार को अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर नया हमला बोला। कांग्रेस का दावा है कि इस्लामाबाद द्वारा वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। विपक्षी दल ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर का लोकप्रिय होना भारत की कूटनीतिक रणनीति में पूर्ण परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर पोस्ट किया कि विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ देश बताया है, वह आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तरह के कूटनीतिक बदलाव करने में बिल्कुल असमर्थ हैं। रमेश की टिप्पणी विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस पूर्व बयान के संदर्भ में थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत वैश्विक भू-राजनीति में “दलाल देश” यानी मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता। यह बयान उन्होंने पाकिस्तान द्वारा वार्ता में मध्यस्थता करने के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में दिया था।
रमेश ने यह भी कहा, लेकिन ओसामा बिन लादेन और अन्य आतंकवादियों को पनाह देने, अफगानिस्तान में बमबारी करने और एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने के बाद यह अब एक महत्वपूर्ण राजनयिक भूमिका निभा रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी की क्षेत्रीय और वैश्विक भागीदारी और विमर्श प्रबंधन पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रहा है, बल्कि उसे एक बिल्कुल नई ‘ब्रांडिंग’ मिली है। रमेश के अनुसार नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार पाकिस्तान को अलग थलग करने में सफल हुई थी।
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उन्होंने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जिसके भड़काऊ बयान ने पहलगाम आतंकवादी हमले के लिए ऑक्सीजन प्रदान की थी, राष्ट्रपति ट्रंप का बहुत पसंदीदा बन गया है। यह भारत के लिए विशेष रूप से गंभीर झटका है। यह स्पष्ट है कि फील्ड मार्शल और उसके सहयोगी ट्रंप के परिवार और सहयोगियों वाले तंत्र को भारत की तुलना में कहीं बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के लिए एक बड़ा झटका है। रमेश ने कहा, ‘‘भारत को अपने कूटनीतिक संपर्क की रणनीति आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है, जिसे करने में प्रधानमंत्री मोदी बिलकुल असमर्थ हैं।


