Tamil Nadu Assembly Election 2026 से पहले शहरी और ग्रामीण वोटिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव देखा गया है। शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह लगभग स्थिर रही है। Tiruporur जैसी अहम सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक हो गई है, जिससे चुनावी नतीजों पर इसका असर पड़ सकता है।
शहरी-ग्रामीण मतदाता पैटर्न में बड़ा बदलाव
निर्वाचन आयोग के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों में मतदाताओं की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है। उदाहरण के तौर पर, चेन्नई की थाउजेंड लाइट्स, वेलचरी और टी नगर सीटों पर पंजीकृत वोटर्स में 30% से ज्यादा की कमी आई है। कोयंबत्तूर (दक्षिण) में 23.83% और कोलत्तूर में 28.3% की गिरावट रही। विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बढ़ते प्रवास के चलते यह बदलाव हुआ है।
इसके विपरीत, ग्रामीण इलाकों में मतदाता संख्या में मामूली गिरावट देखी गई है। 2021 के चुनाव में डीएमके गठबंधन ने शहरी सीटों पर 80% और ग्रामीण क्षेत्रों में 62% सीटें जीती थीं। वहीं, एआईएडीएमके को 75 में से 58 सीटें ग्रामीण क्षेत्रों से मिली थीं।
Tiruporur सीट: शहरीकरण और बुनियादी समस्याएं
चेंगलपेट जिले की Tiruporur विधानसभा सीट तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रही है। यहां पारंपरिक गांव, IT सेक्टर, बहुमंजिला अपार्टमेंट्स, औद्योगिक पार्क और कृषि भूमि एक साथ मौजूद हैं। क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं की कमी, जल संकट, जलभराव, यातायात जाम और खराब सड़कों की समस्या प्रमुख है। IT कर्मचारियों और नए निवासियों के लिए जल निकासी और यातायात सुविधाएं जरूरी हैं, जबकि महिलाएं पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा की मांग कर रही हैं।
महिला मतदाता बनीं निर्णायक
Tiruporur में कुल 3,12,939 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें 1,59,458 महिलाएं, 1,53,425 पुरुष और 56 ट्रांसजेंडर शामिल हैं। यहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। 2019 की तुलना में वोटर्स की संख्या में 15.58% की बढ़ोतरी हुई है।
कड़ा चुनावी मुकाबला और युवाओं की भूमिका
पिछले चुनावों में Tiruporur में जीत का अंतर बहुत कम रहा है, जिससे मुकाबला बेहद कड़ा रहता है। 2021 में वीसीके के एसएस बालाजी ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2016 में जीत का अंतर केवल 950 वोट था। इस बार भी वीसीके, पीएमके, टीवीके और एनटीके के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिल रहा है। युवाओं, महिलाओं और नए मतदाताओं की भूमिका दोनों शहरी और ग्रामीण सीटों पर निर्णायक रह सकती है।



