US Iran Peace Talks: मिडिल ईस्ट समझौते पर इस्लामाबाद के बैठक में कौन-कौन नेता होंगे शामिल? देखें पूरी लिस्ट

US Iran Peace Talks: मिडिल ईस्ट समझौते पर इस्लामाबाद के बैठक में कौन-कौन नेता होंगे शामिल? देखें पूरी लिस्ट

US Iran Peace Talks: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद आज एक बेहद अहम कूटनीतिक हलचल का गवाह बनने जा रही है। शनिवार को यहां अमेरिका और ईरान के बीच वह बातचीत होने वाली है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या इससे टकराव खत्म होगा या हालात और बिगड़ेंगे? हालांकि इस बातचीत तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं रहा। ईरान ने पहले इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था। वजह थी लेबनान पर इजराइल के हमले। लेकिन बाद में हालात बदले और तेहरान ने बातचीत के लिए हामी भर दी। अब दोनों देशों के प्रतिनिधि इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।

ट्रंप का सख्त संदेश

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत से पहले ही अपनी सख्त मंशा जाहिर कर दी है। उनका कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जल्द खोला जाएग चाहे ईरान साथ दे या नहीं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

पाकिस्तान निभा रहा अहम रोल

इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान सिर्फ मेजबान नहीं, बल्कि मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है। पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक डार, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद आसिम मलिक इस प्रक्रिया में शामिल हैं।

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अमेरिका और ईरान की टीमें

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। उनके साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जेरेड कुशनर और यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर मौजूद रहेंगे। वहीं, ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रावंची और सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत करने वाले ईरानी डेलिगेशन में 80 से ज्यादा लोग शामिल है। इस डेलिगेशन की अध्यक्षता ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ कर रहे हैं।

आमने-सामने नहीं होगी बात

यह बातचीत थोड़ी अलग तरह की होगी। दोनों देशों के प्रतिनिधि एक ही होटल—इस्लामाबाद के सेरेना होटल में ठहरेंगे, लेकिन आमने-सामने बैठकर चर्चा नहीं करेंगे। इसके बजाय “प्रॉक्सिमिटी टॉक्स” का तरीका अपनाया जाएगा। यानी दोनों टीमें अलग-अलग कमरों में रहेंगी और पाकिस्तानी अधिकारी एक कमरे से दूसरे कमरे तक संदेश पहुंचाएंगे। यह तरीका तब अपनाया जाता है जब दोनों पक्ष सीधे बातचीत करने से बचना चाहते हैं, लेकिन संवाद जारी रखना भी जरूरी होता है।

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