वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में एक बार फिर हल्की तेजी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों का रुझान सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। हालांकि इसके बावजूद मार्च महीने में सोना अपने लगभग साढ़े सत्रह साल के सबसे खराब प्रदर्शन की ओर बढ़ता दिख रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार मंगलवार को सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 3 से 4 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में आई तेज रिकवरी के बाद निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश की तरफ रुख किया है। लेकिन इसके उलट, पूरे महीने के आंकड़े देखें तो सोने में करीब 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जो 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है।
बता दें कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। गौरतलब है कि महंगाई बढ़ने पर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो जाती है, जिससे सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है।
इसी बीच खबर आई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने पर विचार कर रहे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की रणनीति से जुड़ा हो सकता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति करता है। हालांकि इस क्षेत्र में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, जिससे ऊर्जा और महंगाई को लेकर चिंताएं खत्म नहीं हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर न सिर्फ सोने बल्कि अन्य धातुओं पर भी पड़ेगा। चांदी और प्लेटिनम जैसी धातुओं में भी इस महीने भारी गिरावट देखने को मिली है, हालांकि मंगलवार को इनमें कुछ सुधार दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक भी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त रुख अपना सकते हैं। इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ती है, जो सोने के लिए नकारात्मक संकेत मानी जाती है।
कुल मिलाकर बाजार में फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जहां एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर ले जा रहा है, वहीं दूसरी ओर महंगाई और ब्याज दरों का दबाव सोने की चमक को कम करता दिख रहा है।


