Property Registration – नए वित्तीय वर्ष में देशभर में बदलावों के बीच मध्यप्रदेश में भी कई नए नियम लागू होंगे। प्रदेश में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी। रजिस्ट्री कराने वालों पर तिहरी मार पड़ेगी। विभिन्न जिलों की कलेक्टर गाइडलाइन में हजारों लोकेशन पर 5 से लेकर 300 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। आरसीसी स्ट्रक्चर निर्माण की कीमत बढ़ाई गई है। रही सही कसर गाइडलाइन के साथ लागू उपबंध पूरी कर देंगे। इससे रजिस्ट्री Property Registration डेढ़ गुनी महंगी होगी। प्रदेश में जमीन की कीमतों में औसतन 16 प्रतिशत वृद्धि होगी।
मध्यप्रदेश में एक लाख से अधिक लोकेशन में से करीब 65 हजार स्थानों पर रेट बढ़े हैं। सबसे ज्यादा वृद्धि इंदौर में 300 फीसदी तो भोपाल में 180 प्रतिशत तक रेट बढ़ेंगे। बुधवार से रजिस्ट्री के लिए नए रेट के आधार पर ही जमीन के मूल्य का आकलन होगा। आरसीसी स्ट्रक्चर वाले मकानों की निर्माण लागत 1000 रुपए प्रति वर्ग मीटर बढ़ेगी। लग्जरी सुविधाओं वाले अपार्टमेंट जिनमें स्विमिंग पूल, जिम, जकूजी आदि होंगे, रजिस्ट्री के लिए उनके मूल्य का आकलन उस क्षेत्र की सामान्य गाइडलाइन 10 प्रतिशत बढ़ाकर किया जाएगा।
इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में निर्माण लागत 14000 रुपए प्रति वर्गमीटर रहेगी। अन्य नगर निगम क्षेत्रों में निर्माण लागत 13 हजार रुपए, नगर पालिका क्षेत्रों में 11 हजार, नगर पंचायत क्षेत्रों में 9 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में 7 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर लगेगी।
क्रेडाई ने नई गाइडलाइन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए लागू नहीं करने की मांग की
क्रेडाई ने नई गाइडलाइन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए लागू नहीं करने की मांग की है। कहा, सर्कल रेट बढ़ाए बिना भी कई राज्यों में राजस्व में कमी नहीं आई है। क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने बताया, अभी रियल एस्टेट सेक्टर कई तरह अनिश्चितताओं से गुजर रहा है। रेट बढ़ाना उचित नहीं।
तथ्य व तर्क ये भी हैं-
मप्र में 2009 से लगातार गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है। इससे कई क्षेत्रों में सरकारी दरें बाजार से ऊपर पहुंच चुकी हैं।
भोपाल में 21 साल तो अन्य शहरों में 5 साल से नई विकास योजना/मास्टर प्लान लागू नहीं। निर्माण योग्य लैंड-यूज की उपलब्धता रुकी है। वैध सप्लाई सीमित और गाइडलाइन वृद्धि से नए हाउसिंग प्रोजेक्ट, निवेश और अफोर्डेबिलिटी प्रभावित।
मास्टरप्लान लागू नहीं होने से अवैध कॉलोनियों का विस्तार हुआ। इससे बाजार के प्राइस-सिग्नल डिस्टॉर्ट हुए। ऐसे में वैध बाजार की गाइडलाइन बढ़ाना सही नहीं।
गाइडलाइन से कम दाम पर रजिस्ट्री कराना व्यवहारिक रूप से कठिन है, क्योंकि आयकर प्रावधानों के कारण बायर और सेलर पर वैल्यू डिफरेंस का जोखिम है।


