ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) का 26वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि इस युद्ध में अमेरिका (United States Of America) की जीत हो गई है। इसके साथ ही उन्होंने युद्ध खत्म करने के लिए ईरान को 15 मांगों वाला शांति प्रस्ताव भेजा है। ईरान ने भी युद्ध खत्म करने के लिए अपनी मांगें रख दी हैं। हालांकि इसके बावजूद इज़रायल के हमले नहीं रुक रहे।
कैस्पियन सागर में इज़रायल ने दागीं मिसाइलें
युद्ध के बीच इज़रायल ने पहली बार कैस्पियन सागर (Caspian Sea) में मिसाइलें दागीं हैं। इज़रायल ने दावा किया है कि उनकी सेना ने कैस्पियन सागर में रूस-ईरान के हथियार सप्लाई लाइन को निशाना बनाया है। लंबे समय से कैस्पियन सागर रूस (Russia) और ईरान के बीच एक सुरक्षित कॉरिडोर बना हुआ है, क्योंकि यह इलाका अमेरिकी नेवी की पहुंच से बाहर माना जाता है। ऐसे में दोनों देश इसी रास्ते से हथियारों की सप्लाई करते हैं।
बढ़ सकता है तनाव
अमेरिका की तरफ से भले ही इस युद्ध में अब शांति वार्ता पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन इज़रायल ने साफ कर दिया है कि ईरान पर हमले नहीं रुकेंगे। कैस्पियन सागर में हमले करने से रूस और ईरान के हथियारों की सप्लाई पर असर पड़ेगा, जिससे तनाव बढ़ेगा। इज़रायल के इस हमले का सिर्फ सैन्य प्रभाव नहीं, बल्कि आर्थिक प्रभाव भी पड़ेगा। इस रास्ते से रूस और ईरान के बीच सिर्फ हथियारों की ही नहीं, बल्कि गेहूं और खाने-पीने के अन्य सामान की भी सप्लाई होती है। ऐसे में इज़रायली हमले से फूड सिक्योरिटी पर भी असर पड़ सकता है।
रूस ने की हमले की निंदा
रूस ने इज़रायल के इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे एक सिविलियन ट्रेड हब पर हमला बताया है। रूस ने चेतावनी दी है कि इस तरह के हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा और जंग और बढ़ेगी। गौरतलब है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस शुरू से ही शाहेद ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है, जो ईरान से भी सप्लाई किए जाते हैं। ज़्यादा महंगे न होने की वजह से रूस के लिए यूक्रेन के खिलाफ ये ड्रोन्स काफी अहम हैं।


