विकास और पर्यावरण के संतुलन की एक सुखद तस्वीर सेंधवा वनमंडल से सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-3 (खलघाट से महाराष्ट्र सीमा) के फोरलेन चौड़ीकरण में कटी वनभूमि की भरपाई के लिए वन विभाग ने कमाल कर दिया है। सेंधवा डीएफओ आईएस गडरिया ने बताया कि वन परिक्षेत्र सेंधवा के सालीकला बीट (कक्ष क्रमांक-716 आरएफ) की 50 हेक्टेयर बंजर भूमि को कड़ी मेहनत से घने जंगल में तब्दील कर दिया गया है। अवैध चराई रोकने के लिए ग्रामीणों को समझाइश देकर मवेशियों को खुला छोड़ने के बजाय बांधकर चराने (कंट्रोल ग्रेजिंग) अपनाई गई। मवेशियों के लिए रोपण क्षेत्र से अब तक 660 बैलगाड़ी चारा मुफ्त बांटा जा चुका है। साथ ही वानिकी कार्यों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला। आगे माइक्रोप्लान के तहत ग्रामीणों को विरलन (थिनिंग) से निकलने वाली लकड़ी और वनोपज भी मुफ्त या न्यूनतम दर पर मिलेगी। पहले और अब की स्थिति साल 2014 में पूरी तरह वनविहीन, सूखी और पथरीली बंजर पहाड़ी थी, जहां एक भी पेड़ नहीं था। अब यह क्षेत्र 83,200 पौधों से लहलहा रहा है। ग्राम वन समिति सालीकला के सहयोग से रोपे गए 52,000 सागौन के पौधों में से 88.29% जीवित हैं (ऊंचाई 7-8 मीटर), जबकि 31,200 मिश्रित प्रजाति के पौधों में से 76% जीवित हैं (ऊंचाई 8-9 मीटर)।


