‘हम लोग गरीब परिवार से हैं। पिता बूढ़े हैं, भाई ज्यादा मतलब नहीं रखता है। वो अपनी पत्नी के साथ अलग रहता है। घर चलाने और हम लोगों की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी। एक दिन बाजार में मेरी और चचेरी बहन की रेखा नाम की एक लड़की से मुलाकात हुई। रेखा ने हम लोगों को कंपनी में जॉब का लालच दिया और फिर ऑर्केस्ट्रा के दलदल में धकेल दिया। ऑर्केस्ट्रा में हम लोगों का काम करने का मन नहीं था। नालंदा आने के बाद जब हम लोगों ने इस काम को करने से मना किया तो हमारे साथ मारपीट की गई। हमारा मोबाइल भी छीन लिया गया। अगर हम लोग कभी घर पर बात करने के लिए मोबाइल मांगते थे तो हमारे साथ मारपीट की जाती थी, देहव्यापार में धकेलने की धमकी दी जाती थी।’ उत्तर प्रदेश के एक जिले की एक नाबालिग ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। नाबालिग ने बताया कि 8 से 10 दिन पहले मैं अपनी चचेरी बहन के साथ नालंदा से भागी थी और घर पहुंचकर पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 लड़कियों का रेस्क्यू किया। दरअसल, नालंदा के सरमेरा इलाके में 22 फरवरी को नालंदा पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की ओर से एक किराए के मकान में छापेमारी की गई। चेरो रोड स्थित मकान के अलग-अलग कमरों से 7 नाबालिग और 6 बालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। लड़कियों के रेस्क्यू की पूरी कहानी क्या है, 13 लड़कियां कहां से और कैसे लाई गई थी, 13 लड़कियां यहां कब से फंसी थी, क्या लड़कियों से देहव्यापार कराया जा रहा था? इन सवालों के जवाब नाबालिग लड़कियों ने दैनिक भास्कर से शेयर की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए नाबालिग ने क्या बताया यूपी की रहने वाली 16 साल की अंजलि (काल्पनिक नाम) ने बताया कि मैं और मेरी छोटी चचेरी बहन छत्तीसगढ़ की रहने वाली रेखा नाम की लड़की के संपर्क में आए थे। करीब 3 महीने पहले मेरी बहन और मैं मार्केट में सामान लेने गए थे। इसी दौरान रेखा की बातचीत मेरी छोटी बहन से हुई। रेखा ने उससे कहा कि नालंदा में एक कंपनी में काम है, पैसे भी अच्छे मिलेंगे, क्या तुम काम करने चलोगी। अंजलि ने बताया कि मेरी बहन ने तत्काल मुझसे इस बारे में पूछा। घर की आर्थिक स्थिति देखकर मैंने हां कर दी। इसके बाद मैंने अपनी मां को भी बताया था। मां ने पूछा था कि कैसी कंपनी है, मुझे या मेरी चचेरी बहन को ज्यादा कुछ नहीं पता था, इसलिए हम लोग इस बारे में कुछ नहीं बता पाए। मां से कहा कि वहां पहुंचने के बाद आपको कॉल करूंगी। 3 महीने से नालंदा में रह रही थी, 10 दिन पहले भागी अंजलि ने बताया, ‘3 महीने पहले मैं अपनी छोटी बहन के साथ रेखा के कहने पर नालंदा आ गई। नालंदा आने के बाद पता चला कि हम लोगों को ऑर्केस्ट्रा में काम करना है, इसलिए मैंने मना कर दिया। जब काम करने से मना किया तो हम लोगों के साथ मारपीट की गई। मेरा मोबाइल भी छीन लिया गया। पप्पू नाम के एक आरोपी ने धमकी दी थी कि अगर ऑर्केस्ट्रा में काम नहीं करोगी तो तुम लोगों के साथ गलत काम करूंगा। ऑर्केस्ट्रा में जितनी भी लड़कियां थी, उनसे पहले डांस कराया जाता था, फिर गलत काम में धकेल दिया जाता था।’ नाबालिग ने बताया, ‘जो भी लड़की घर से पैसा लेकर आती थी, उससे पैसा भी ले लिया जाता था। मैंने 500 रुपए छिपाकर रखा था। एक दिन कपड़ा सुखाने छत पर बहन के साथ गई और इसी दौरान छत से कूदकर भाग निकली। 3 महीने तक मैं नालंदा में रही थी। हम लोगों को कही आने जाने नहीं दिया जाता था। छत पर भी नहीं जाने दिया जाता था। डांस करने के लिए कही जाना होता था तो एक दो लड़कों को साथ भेजा जाता था, जो हम लोगों पर निगरानी रखता था।’ मोबाइल मांगते थे तो मारपीट की जाती थी अंजलि ने बताया, ‘जब हम लोगों को घर पर बात करनी होती थी तो साथ में मौजूद लड़कों से मोबाइल मांगते थे। बात तो नहीं कराता था, वापस आने पर पप्पू को बता देता था, जिसके बाद पप्पू हम लोगों के साथ मारपीट करता था। हम लोगों के साथ करीब 15 लड़कियां ऑर्केस्ट्रा में काम करती थी। किसी भी लड़की को दूसरी लड़की से बात करने की इजाजत नहीं थी। सभी को अलग-अलग कमरों में रखा जाता था।’ एक दिन का 1000-1500 रुपए देते थे अंजलि ने बताया, ‘डांस करने के लिए बाहर जाने पर हम लोगों को 1000, 1200 से 1500 रुपए दिए जाते थे, लेकिन आज तक ये पैसे न हम लोगों के हाथ में दिए गए और न ही अकाउंट में जमा कराए गए। जिन लड़कियों पर भरोसा हो जाता था, उन्हें घर जाने दिया जाता था। अगर उन्हें लगता था कि लड़की जाने के बाद नहीं आएगी या पुलिस के पास चली जाएगी। ऐसी लड़कियों को न तो किसी से बात करने दिया जाता था, न घर भेजा जाता था।’ दो महिला, एक पुरुष गुर्गों के साथ चला रहे थे रैकेट जानकारी के मुताबिक, ऑर्केस्ट्रा की आड़ में काजल नाम की सरगना, बिचौलिया रेखा अपने पति पप्पू और उसके गुर्गों की मदद से देहव्यापार का धंधा चला रही थी। रेखा अलग-अलग जगहों से लड़कियों की तलाश करती थी, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। रेखा कुछ-कुछ जगहों पर जाकर दो से चार दिन तक होटल में रहती थी और मार्केट, रेलवे स्टेशन समेत अन्य जगहों पर लड़कियों को अपना शिकार बनाती थी। ऐसी लड़कियों के सामने ‘कंपनी’ का झूठा ताना-बाना बुनती थी और वादा करती थी कि उन्हें एक दिन के काम में 1000, 1200 से लेकर 1500 रुपए तक की कमाई होगी। साथ ही उन्हें इन्सेंटिव का भी लालच देती थी। अब जानिए, देहव्यापार के इस रैकेट का खुलासा कैसे हुआ? देह व्यापार के चंगुल से भागने वाली अंजलि और उसकी चचेरी बहन किसी परिचित के जरिए ‘मिशन मुक्ति फाउंडेशन’ तक पहुंची। अंजलि ने अपनी और देह व्यापार के दलदल में फंसी साथी लड़कियों की दर्दनाक कहानी बताई। सूचना मिलते ही ‘मिशन मुक्ति फाउंडेशन’ के सहयोगी पार्टनर ‘प्रयास’ ने गुप्त तरीके से पूरे मामले की जमीनी तफ्तीश की। इसकी पुष्टि हो गई कि सरमेरा में देह व्यापार का रैकेट चलाया जा रहा है तो उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) नई दिल्ली और और पटना में कमजोर वर्ग के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) डॉक्टर अमित जैन से शिकायत की। इसके बाद नालंदा पुलिस की ओर कार्रवाई की गई। ‘हम लोग गरीब परिवार से हैं। पिता बूढ़े हैं, भाई ज्यादा मतलब नहीं रखता है। वो अपनी पत्नी के साथ अलग रहता है। घर चलाने और हम लोगों की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी। एक दिन बाजार में मेरी और चचेरी बहन की रेखा नाम की एक लड़की से मुलाकात हुई। रेखा ने हम लोगों को कंपनी में जॉब का लालच दिया और फिर ऑर्केस्ट्रा के दलदल में धकेल दिया। ऑर्केस्ट्रा में हम लोगों का काम करने का मन नहीं था। नालंदा आने के बाद जब हम लोगों ने इस काम को करने से मना किया तो हमारे साथ मारपीट की गई। हमारा मोबाइल भी छीन लिया गया। अगर हम लोग कभी घर पर बात करने के लिए मोबाइल मांगते थे तो हमारे साथ मारपीट की जाती थी, देहव्यापार में धकेलने की धमकी दी जाती थी।’ उत्तर प्रदेश के एक जिले की एक नाबालिग ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। नाबालिग ने बताया कि 8 से 10 दिन पहले मैं अपनी चचेरी बहन के साथ नालंदा से भागी थी और घर पहुंचकर पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 लड़कियों का रेस्क्यू किया। दरअसल, नालंदा के सरमेरा इलाके में 22 फरवरी को नालंदा पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की ओर से एक किराए के मकान में छापेमारी की गई। चेरो रोड स्थित मकान के अलग-अलग कमरों से 7 नाबालिग और 6 बालिग लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। लड़कियों के रेस्क्यू की पूरी कहानी क्या है, 13 लड़कियां कहां से और कैसे लाई गई थी, 13 लड़कियां यहां कब से फंसी थी, क्या लड़कियों से देहव्यापार कराया जा रहा था? इन सवालों के जवाब नाबालिग लड़कियों ने दैनिक भास्कर से शेयर की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए नाबालिग ने क्या बताया यूपी की रहने वाली 16 साल की अंजलि (काल्पनिक नाम) ने बताया कि मैं और मेरी छोटी चचेरी बहन छत्तीसगढ़ की रहने वाली रेखा नाम की लड़की के संपर्क में आए थे। करीब 3 महीने पहले मेरी बहन और मैं मार्केट में सामान लेने गए थे। इसी दौरान रेखा की बातचीत मेरी छोटी बहन से हुई। रेखा ने उससे कहा कि नालंदा में एक कंपनी में काम है, पैसे भी अच्छे मिलेंगे, क्या तुम काम करने चलोगी। अंजलि ने बताया कि मेरी बहन ने तत्काल मुझसे इस बारे में पूछा। घर की आर्थिक स्थिति देखकर मैंने हां कर दी। इसके बाद मैंने अपनी मां को भी बताया था। मां ने पूछा था कि कैसी कंपनी है, मुझे या मेरी चचेरी बहन को ज्यादा कुछ नहीं पता था, इसलिए हम लोग इस बारे में कुछ नहीं बता पाए। मां से कहा कि वहां पहुंचने के बाद आपको कॉल करूंगी। 3 महीने से नालंदा में रह रही थी, 10 दिन पहले भागी अंजलि ने बताया, ‘3 महीने पहले मैं अपनी छोटी बहन के साथ रेखा के कहने पर नालंदा आ गई। नालंदा आने के बाद पता चला कि हम लोगों को ऑर्केस्ट्रा में काम करना है, इसलिए मैंने मना कर दिया। जब काम करने से मना किया तो हम लोगों के साथ मारपीट की गई। मेरा मोबाइल भी छीन लिया गया। पप्पू नाम के एक आरोपी ने धमकी दी थी कि अगर ऑर्केस्ट्रा में काम नहीं करोगी तो तुम लोगों के साथ गलत काम करूंगा। ऑर्केस्ट्रा में जितनी भी लड़कियां थी, उनसे पहले डांस कराया जाता था, फिर गलत काम में धकेल दिया जाता था।’ नाबालिग ने बताया, ‘जो भी लड़की घर से पैसा लेकर आती थी, उससे पैसा भी ले लिया जाता था। मैंने 500 रुपए छिपाकर रखा था। एक दिन कपड़ा सुखाने छत पर बहन के साथ गई और इसी दौरान छत से कूदकर भाग निकली। 3 महीने तक मैं नालंदा में रही थी। हम लोगों को कही आने जाने नहीं दिया जाता था। छत पर भी नहीं जाने दिया जाता था। डांस करने के लिए कही जाना होता था तो एक दो लड़कों को साथ भेजा जाता था, जो हम लोगों पर निगरानी रखता था।’ मोबाइल मांगते थे तो मारपीट की जाती थी अंजलि ने बताया, ‘जब हम लोगों को घर पर बात करनी होती थी तो साथ में मौजूद लड़कों से मोबाइल मांगते थे। बात तो नहीं कराता था, वापस आने पर पप्पू को बता देता था, जिसके बाद पप्पू हम लोगों के साथ मारपीट करता था। हम लोगों के साथ करीब 15 लड़कियां ऑर्केस्ट्रा में काम करती थी। किसी भी लड़की को दूसरी लड़की से बात करने की इजाजत नहीं थी। सभी को अलग-अलग कमरों में रखा जाता था।’ एक दिन का 1000-1500 रुपए देते थे अंजलि ने बताया, ‘डांस करने के लिए बाहर जाने पर हम लोगों को 1000, 1200 से 1500 रुपए दिए जाते थे, लेकिन आज तक ये पैसे न हम लोगों के हाथ में दिए गए और न ही अकाउंट में जमा कराए गए। जिन लड़कियों पर भरोसा हो जाता था, उन्हें घर जाने दिया जाता था। अगर उन्हें लगता था कि लड़की जाने के बाद नहीं आएगी या पुलिस के पास चली जाएगी। ऐसी लड़कियों को न तो किसी से बात करने दिया जाता था, न घर भेजा जाता था।’ दो महिला, एक पुरुष गुर्गों के साथ चला रहे थे रैकेट जानकारी के मुताबिक, ऑर्केस्ट्रा की आड़ में काजल नाम की सरगना, बिचौलिया रेखा अपने पति पप्पू और उसके गुर्गों की मदद से देहव्यापार का धंधा चला रही थी। रेखा अलग-अलग जगहों से लड़कियों की तलाश करती थी, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। रेखा कुछ-कुछ जगहों पर जाकर दो से चार दिन तक होटल में रहती थी और मार्केट, रेलवे स्टेशन समेत अन्य जगहों पर लड़कियों को अपना शिकार बनाती थी। ऐसी लड़कियों के सामने ‘कंपनी’ का झूठा ताना-बाना बुनती थी और वादा करती थी कि उन्हें एक दिन के काम में 1000, 1200 से लेकर 1500 रुपए तक की कमाई होगी। साथ ही उन्हें इन्सेंटिव का भी लालच देती थी। अब जानिए, देहव्यापार के इस रैकेट का खुलासा कैसे हुआ? देह व्यापार के चंगुल से भागने वाली अंजलि और उसकी चचेरी बहन किसी परिचित के जरिए ‘मिशन मुक्ति फाउंडेशन’ तक पहुंची। अंजलि ने अपनी और देह व्यापार के दलदल में फंसी साथी लड़कियों की दर्दनाक कहानी बताई। सूचना मिलते ही ‘मिशन मुक्ति फाउंडेशन’ के सहयोगी पार्टनर ‘प्रयास’ ने गुप्त तरीके से पूरे मामले की जमीनी तफ्तीश की। इसकी पुष्टि हो गई कि सरमेरा में देह व्यापार का रैकेट चलाया जा रहा है तो उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) नई दिल्ली और और पटना में कमजोर वर्ग के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) डॉक्टर अमित जैन से शिकायत की। इसके बाद नालंदा पुलिस की ओर कार्रवाई की गई।


