नागौर. जिले में जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कागजों में जहां एक डीएसटी का गठन बताया जा रहा है, वहीं धरातल पर दो अलग-अलग टीमें सक्रिय होकर काम कर रही हैं, एक मेड़ता डीएसटी और दूसरी नागौर डीएसटी के नाम से। दोनों के प्रभारी भी अलग-अलग हैं। जबकि पीएचक्यू के स्पष्ट आदेश हैं कि एक जिले में एक ही डीएसटी होनी चाहिए।
हाल ही में नागौर शहर के एक हिस्ट्रीशीटर व डीएसटी के कांस्टेबल के बीच हुई बातचीत का वीडियो वायरल होने के बाद जिस प्रकार एसपी रोशन मीना ने मंगलवार को एक के बाद एक करके तीन कांस्टेबलों को निलम्बित किया व पूरी डीएसटी टीम को लाइन हाजिर किया, उससे डीएसटी की कार्यशैली पर सवालों की झड़ी लग गई है। हालांकि एसपी मीना ने कार्रवाई के माध्यम से पुलिस की छवि खराब करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कर सख्त संदेश दिया है, लेकिन आमजन में डीएसटी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वीडियो में हिस्ट्रीशीटर के सामने जिस प्रकार पुलिस कांस्टेबल गिड़गिड़ा रहा है, उससे यह चर्चा तेज हो गई कि कुछ पुलिसकर्मियों का तस्करों से सीधा संपर्क था।
आरोपियों को भेजा जेल, अब पुलिसकर्मियों से होगी पूछताछ
इधर, डीएसटी पर हमले के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों अशोक भाटी और दिनेश जाट को गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद बुधवार को जेल भेज दिया। अब इस प्रकरण की जांच कर रहे आईपीएस अधिकारी जतिन जैन डीएसटी से जुड़े पुलिसकर्मियों से पूछताछ करेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी खंगाले जाएंगे। माना जा रहा है कि इन सबूतों से तस्करों और पुलिसकर्मियों के बीच संभावित संपर्क को लेकर नए खुलासे हो सकते हैं। पूरे घटनाक्रम के बाद नागौर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बीच अब विभागीय जांच से सच्चाई सामने आने और व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
नई डीएसटी में पांच पुराने पुलिसकर्मी
नागौर जिले में पूर्व में गठित जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) एवं उसमें नियुक्त कार्मिकों के स्थान पर नवनिर्मित गठन करने के लिए तत्कालीन एसपी मृदुल कच्छावा ने गत 18 दिसम्बर 2025 को नई जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) का गठन किया था, जिसमें कुल 16 पुलिस अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों को शामिल किया था। हालांकि कहने को नई डीएसटी का गठन किया गया, लेकिन इसमें एक सीआई विजय सिंह सहित पुलिसकर्मी कालूराम, बलदेव, कमल व रामाकिशन पहले भी डीएसटी में शामिल थे।
पुलिस विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि नियमानुसार कोई भी पुलिसकर्मी डीएसटी में चार साल से अधिक समय तक नहीं रह सकता, जबकि किसी थाने में पांच साल और एक सर्किल में 15 साल से ज्यादा पदस्थापन भी नियमों के विरुद्ध है। बावजूद इसके, नागौर में कई पुलिसकर्मी लंबे समय से डीएसटी में जमे हुए हैं।
नई डीएसटी में इनको किया था शामिल
नई डीएसटी में एसआई विजय सिंह व मुकेश कुमार यादव, हेड कांस्टेबल ओमप्रकाश व महेन्द्र डूकिया, कांस्टेबल सुरेश कुमार, दिनेश स्वामी, कालूराम, बलदेवराम बाना, कमल किशोर, रामाकिशन, नरसीराम, रामस्वरूप, मुकेश छाबा, चंदाराम, चतुर्भुज व मोतीराम को शामिल किया गया।
एडीजी ने गत महीने जारी किए थे निर्देश
एक जिले में दो-दो डीएसटी को लेकर पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी सख्त हैं। गत 12 मार्च को अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) विशाल बंसल ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी कर पूर्व में जारी स्थाई आदेश संख्या 17/2019 की अक्षरश: पालना सुनिश्चित करने को कहा था। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित डीएसटी के अलावा अन्य किसी भी स्तर पर समान उद्देश्य से गठित विशेष टीमों को तुरंत समाप्त किया जाए।
पहले भी विवादों में रही है डीएसटी
जिले में डीएसटी गठन करने के बाद विवादों में आने पर कई बार समाप्त किया गया और वापस गठन किया गया। तत्कालीन एसपी अभिजीत सिंह के समय गठित हुई डीएसटी कुछ दिनों बाद विवादों में आई तो भंग कर दिया गया। इसके बाद नारायण टोगस के समय रोल थाना क्षेत्र में डीएसटी प्रभारी को सूचना दिए बिना पहुंचे तीन पुलिसकर्मियों पर एक व्यक्ति से बंदूक की नोक पर 15 लाख रुपए लूट कर ले जाने का आरोप लगा। इसको लेकर पुखराज नाम के व्यक्ति ने रोल थाने में तीन पुलिसकर्मियों सहित चार जनों के खिलाफ रिपेार्ट भी दी थी।


