बांका में गुरुवार की शाम 17 वर्षीय किशोरी ने अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना बेलहर थाना क्षेत्र अंतर्गत बेला खुटहरी गांव की है। मृतका की पहचान रंजन कुमार की बेटी अमृता रंजन के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अमृता पिछले दो-तीन दिनों से ठीक से खाना-पीना नहीं खा रही थी। वह किसी से बातचीत भी नहीं कर रही थी और अधिकतर समय छत के ऊपर स्थित अपने कमरे में गुमसुम रहती थी। परिजनों ने बताया कि किशोरी मानसिक रूप से परेशान थी। हालांकि, उसने यह कदम क्यों उठाया, इसकी स्पष्ट जानकारी परिवार के किसी सदस्य को नहीं है। बोनाफाइड प्रमाणपत्र बनवाने गए थे पिता मृतका के पिता रंजन कुमार ने बताया कि बुधवार को वह बेटा का बोनाफाइड प्रमाणपत्र ऑनलाइन बनवाने के लिए साहबगंज बाजार गए थे। उस समय उसकी मां भी घर पर मौजूद नहीं थी। इसी दौरान अमृता ने अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा लगा लिया। घर लौटने के बाद मां ने उसे आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब वह ऊपर कमरे में पहुंचीं तो पुत्री को फंदे से लटका पाया। मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों की मदद से फंदे से उतारा शव ग्रामीणों के सहयोग से किशोरी को फंदे से उतारकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलहर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पिता भी अस्पताल पहुंचे। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बांका भेज दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। मां हिना देवी, पिता रंजन कुमार, भाई अमोद कुमार सहित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस संबंध में थानाध्यक्ष विजयेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से लिखित आवेदन मिलने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पुलिस घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। बांका में गुरुवार की शाम 17 वर्षीय किशोरी ने अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना बेलहर थाना क्षेत्र अंतर्गत बेला खुटहरी गांव की है। मृतका की पहचान रंजन कुमार की बेटी अमृता रंजन के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अमृता पिछले दो-तीन दिनों से ठीक से खाना-पीना नहीं खा रही थी। वह किसी से बातचीत भी नहीं कर रही थी और अधिकतर समय छत के ऊपर स्थित अपने कमरे में गुमसुम रहती थी। परिजनों ने बताया कि किशोरी मानसिक रूप से परेशान थी। हालांकि, उसने यह कदम क्यों उठाया, इसकी स्पष्ट जानकारी परिवार के किसी सदस्य को नहीं है। बोनाफाइड प्रमाणपत्र बनवाने गए थे पिता मृतका के पिता रंजन कुमार ने बताया कि बुधवार को वह बेटा का बोनाफाइड प्रमाणपत्र ऑनलाइन बनवाने के लिए साहबगंज बाजार गए थे। उस समय उसकी मां भी घर पर मौजूद नहीं थी। इसी दौरान अमृता ने अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा लगा लिया। घर लौटने के बाद मां ने उसे आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब वह ऊपर कमरे में पहुंचीं तो पुत्री को फंदे से लटका पाया। मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों की मदद से फंदे से उतारा शव ग्रामीणों के सहयोग से किशोरी को फंदे से उतारकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलहर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पिता भी अस्पताल पहुंचे। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बांका भेज दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। मां हिना देवी, पिता रंजन कुमार, भाई अमोद कुमार सहित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस संबंध में थानाध्यक्ष विजयेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों की ओर से लिखित आवेदन मिलने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पुलिस घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

