Nayyi Navelli Review: रहस्यमयी कहानी में लगा कॉमेडी और फैंटेसी का तड़का, यामी गौतम ने ‘डायन’ बनकर किया इंप्रेस

Nayyi Navelli Review: रहस्यमयी कहानी में लगा कॉमेडी और फैंटेसी का तड़का, यामी गौतम ने ‘डायन’ बनकर किया इंप्रेस

Nayyi Navelli Movie Review: यामी गौतम की फिल्म ‘नई नवेली’ भी आज यानी 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। बालाजी मोहन के निर्देशन में बनी ये फिल्म हॉरर, कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और भारतीय पौराणिक कथाओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश करती है। करीब 138 मिनट लंबी ये कहानी एक ऐसी नई बहू के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी साधारण नजर आने वाली जिंदगी के पीछे एक ऐसा रहस्य छिपा है, जिसके सामने आने के बाद पूरे परिवार की दुनिया बदल जाती है।

कैसी है ‘नई नवेली’ की कहानी?

फिल्म में यामी गौतम मोहिनी का किरदार निभा रही हैं, जो शादी के बाद एक नए परिवार में बहू बनकर आती हैं। शुरुआत में मोहिनी बेहद संस्कारी, सरल और मिलनसार नजर आती हैं। अपने व्यवहार से वो जल्द ही परिवार के सदस्यों का दिल जीत लेती हैं। सब कुछ सामान्य चल रहा होता है, लेकिन कुछ समय बाद घर में अजीब घटनाएं होने लगती हैं।

परिवार के एक सदस्य को मोहिनी की असली पहचान पर शक होता है। उसे लगता है कि जिस महिला को परिवार एक सीधी-सादी बहू समझ रहा है, उसके पीछे कोई पुराना और रहस्यमयी राज छिपा है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे भारतीय परंपराओं, पौराणिक मान्यताओं और सुपरनैचुरल घटनाओं की तरफ बढ़ती है। खास बात यह है कि इन रहस्यमयी घटनाओं को पारिवारिक रिश्तों और हास्य के साथ जोड़ा गया है।

यामी गौतम ने जीता दिल

मोहिनी के किरदार में यामी गौतम फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक तरफ वह एक सामान्य और संस्कारी बहू के रूप में सहज दिखाई देती हैं, वहीं रहस्य से जुड़े दृश्यों में उनका अंदाज पूरी तरह बदल जाता है। उनकी आंखों के भाव और बॉडी लैंग्वेज कई दृश्यों में माहौल को डरावना बनाने का काम करते हैं।

आदिनाथ एम. कोठारे ने मोहिनी के पति का किरदार निभाया है। उनके किरदार के सामने पत्नी पर भरोसा करने और परिवार के संदेह के बीच एक भावनात्मक उलझन रहती है, जिसे उन्होंने संतुलित तरीके से निभाया है।

सुनीता राजवार, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी, अनुराग ठाकुर, प्रतीक पचौरी और सोनल झा समेत सपोर्टिंग कलाकार भी फिल्म के हल्के-फुल्के हिस्सों को मजबूत बनाते हैं। खासकर सुनीता राजवार और मीता वशिष्ठ की कॉमिक टाइमिंग कई जगह मनोरंजन करती है।

निर्देशन और कहानी की रफ्तार

बालाजी मोहन ने एक ऐसा विषय चुना है जिसमें पारिवारिक कहानी के साथ कॉमेडी और सुपरनैचुरल फैंटेसी को जोड़ना आसान नहीं था। फिल्म का पहला हिस्सा अपेक्षाकृत हल्का और मनोरंजक है। जैसे-जैसे मोहिनी का रहस्य सामने आता है, कहानी फैंटेसी और पौराणिक पहलू की तरफ बढ़ती जाती है।

हालांकि, बीच में कुछ हिस्सों में कहानी की गति थोड़ी धीमी महसूस होती है। कुछ दृश्यों को और छोटा किया जाता तो फिल्म की रफ्तार बेहतर हो सकती थी। वहीं हॉरर और सस्पेंस फिल्मों को ज्यादा देखने वाले दर्शकों को कुछ ट्विस्ट पहले से समझ में आने की संभावना भी है।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म का संगीत इसकी कहानी के माहौल के अनुरूप है। भारतीय लोक धुनों और आधुनिक संगीत का मिश्रण सुनने को मिलता है। खासकर रहस्यमयी दृश्यों में बैकग्राउंड स्कोर कहानी के प्रभाव को बढ़ाता है। कॉमेडी वाले हिस्सों में संगीत हल्का रखा गया है, जबकि तनाव और रहस्य के समय इसकी तीव्रता बढ़ती है।

फाइनल वर्डिक्ट

कुल मिलाकर ‘नई नवेली’ सिर्फ डराने वाली फिल्म नहीं है। इसमें पारिवारिक रिश्ते, कॉमेडी, रहस्य, फैंटेसी और भारतीय पौराणिक संदर्भों का मिश्रण देखने को मिलता है। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यामी गौतम का अलग अंदाज और कहानी को देसी माहौल में पेश करने की कोशिश है।

अगर आप परिवार के साथ ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें हॉरर के साथ कॉमेडी और रहस्य भी हो, तो ‘नई नवेली’ एक विकल्प हो सकती है। हालांकि धीमी रफ्तार और कुछ अनुमान लगाए जा सकने वाले ट्विस्ट इसकी कमजोर कड़ियां हैं।

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