‘2 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं’:मैनपुरी में मानदेय बढ़ाने के लिए महिलाओं का प्रदर्शन, 9 ब्लॉकों की महिला कैडर पहुंचीं डीएम कार्यालय

‘2 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं’:मैनपुरी में मानदेय बढ़ाने के लिए महिलाओं का प्रदर्शन, 9 ब्लॉकों की महिला कैडर पहुंचीं डीएम कार्यालय

मैनपुरी में मानदेय बढ़ाने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर जिले की महिला कैडर ने डीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। जिले के नौ ब्लॉकों से आईं महिलाओं ने मौजूदा 2 हजार रुपए के मानदेय को नाकाफी बताया। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने नारा लगाया- ‘2 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं।’ उन्होंने बकाया मानदेय का भुगतान कराने और मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल शिल्पा मिश्रा ने बताया कि जिले के नौ ब्लॉकों में जिला और ब्लॉक स्तर पर काम करने वाली महिला कैडर अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुई हैं। उनका कहना है कि 2 हजार रुपए के मानदेय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। समय पर भुगतान नहीं होने से महिलाओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलने के बावजूद पर्याप्त मानदेय नहीं मिलने से परिवार में भी नाराजगी होती है। महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रही हैं। लखनऊ के इको गार्डन में धरने की तैयारी शिल्पा मिश्रा के मुताबिक, प्रदेशभर की महिला कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर लखनऊ के इको गार्डन में होने वाले धरने में शामिल होना चाहती हैं। इसी सिलसिले में महिलाएं डीएम कार्यालय पहुंचीं और अपनी मांगों का ज्ञापन देने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर जिले से लेकर लखनऊ तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। 2022 से मानदेय नहीं मिलने का आरोप एफएनएचडब्ल्यू कार्यकर्ता अंजू चौहान ने आरोप लगाया कि वह वर्ष 2022 से काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक मानदेय नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि पूर्व में धरना-प्रदर्शन के दौरान जिलाधिकारी ने सात दिन में समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि, उनके मुताबिक एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। 25,200 रुपए का चेक देकर काम छोड़ने का दबाव बनाने का आरोप अंजू चौहान ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले ब्लॉक और फिर विकास भवन बुलाया गया। वहां उनके नाम से 25,200 रुपए का चेक काटे जाने की जानकारी दी गई। अंजू का कहना है कि उनसे एक आवेदन पर हस्ताक्षर कर काम छोड़ने और अपना मामला समाप्त करने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से 2026 तक का मानदेय बकाया होने के कारण वह इतनी राशि लेकर काम छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुईं। उनके इनकार करने पर चेक वापस रख लेने का भी आरोप लगाया। अंजू के मुताबिक, चेक की फोटोकॉपी अभी उनके पास है। 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय की मांग महिला कैडर ने मांग की कि बकाया मानदेय का पूरा भुगतान कराया जाए और मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिमाह किया जाए। महिलाओं ने कहा कि लंबे समय से काम करने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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