18 साल की दुल्हन के साथ फेरे लेने वाला था 13 साल का दूल्हा, पहुंच गई टीम

18 साल की दुल्हन के साथ फेरे लेने वाला था 13 साल का दूल्हा, पहुंच गई टीम

Child Marriage : अक्षय तृतीया के चलते मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर में बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की अलग-अलग गठित टीमें लगातार कार्रवाई में जुटी हैं। इसी कड़ी में शनिवार को नाबालिग विवाह के शहर में दो अजीबो गरीब मामले सामने आए। इनमें से एक मामले में दुल्हन ने तो वैवाहिक नियानुसार 18 साल पूरे कर लिए थे, पर दोनों ही मामलों में दूल्हा की उम्र महज 13 साल थी। मामले में कलेक्टर ने शुक्रवार को प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किया है।

एक मामले में लड़की के पिता शादी की उम्र 16 वर्ष होने का दावा करते हुए वैवाहिक रस्में आगे बढ़ाने पर अड़ गए। वहीं, दूसरे मामले में दुल्हन के परिजन बेटी की उम्र 21 साल बता रहे थे, लेकिन यहां उसकी उम्र 18 साल ही निकली। लेकिन दोनों ही मामलों में दूल्हा दोनों दुल्हनों से पांच साल छोटा था। फिलहाल, विभाग की टीम द्वारा समझाने के बाद बच्चों के बालिग होने तक परिजन ने विवाह निरस्त करने की सहमति दे दी है।

पहला मामला: पिता बोले- हमारे समाज में 16 साल की उम्र में विवाह की अनुमति

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अक्षय तृतीया पर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्रवाई (Photo Source- Patrika)

पहला मामला शहर के अहिल्या पलटन इलाके में सामने आया। जहां एक घर में शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी। मंडप सज चुका था। दुल्हन को हल्दी लग रही थी। महिलाएं गीत गा रही थीं, तभी महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम पहुंच गई और नाबालिग बेटी की शादी रुकवाई। लड़की के पिता ने टीम के सामने दावा किया कि, उनके समाज में 16 साल की उम्र में विवाह करने की छूट है। जब अधिकारियों ने पिता के दावे से जुड़ा कोई सरकारी नियम या आदेश दिखाने को कहा तो वो चुप रह गए।

18 साल होने में 6 महीने बाकी

टीम द्वारा दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि लड़की की उम्र 18 साल होने में करीब 6 महीने बाकी हैं। इसके बाद अधिकारियों ने जब दूल्हा के दस्तावेज जांचें तो वो महज 13 वर्ष निकली। इसपर टीम ने दोनों पक्षों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधान, सजा और कम उम्र में शादी के नुकसान समझाए। महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी चित्रा यादव, उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक सदस्य संगीता सिंह चाइल्ड लाइन के फूल सिंह कारपेंटर और टीम के अन्य सदस्यों ने दोनों परिवारों को समझाया। काफी देर तक चली चर्चा के बाद दोनों पक्ष शादी टालने पर राजी हो गए।

सिर्फ मेहमान करेंगे भोजन, शादी नहीं होगी

मामले को लेकर परिजन का कहना है कि, शादी की तैयारी में काफी खर्च हो चुका है। निमंत्रण भी बांटे जा चुके हैं। ऐसे में मेहमानों को खाली नहीं लौटाया जा सकता। इस पर प्रशासन ने उन्हें सिर्फ भोजन कराने की अनुमति दी। यहां टीम ने स्पष्ट किया कि, 19 अप्रैल को शादी के दिन दोनों परिवारों पर नजर रखी जाएगी। शपथ पत्र देने के बावजूद भी अगर उन्होंने बाल विवाह करने की कोशिश की तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरा मामला: दुल्हन 18 की पर दूल्हा 13 साल का

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अक्षय तृतीया पर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्रवाई (Photo Source- Patrika)

दूसरा मामला राऊ थाना इलाके के संजय नगर से सामने आया, जहां 19 अप्रैल यानी आज होने वाले विवाह की तैयारियां गुपचुप तरीके से की जा रही थी। चाइल्ड हेल्पलाइन पर शिकायत मिलने के बाद एसडीएम गोपाल वर्मा के निर्देशन में टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने दूल्हा-दुल्हन के दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि, दुल्हन तो 18 वर्ष पूरे कर चुकी है, पर दूल्हा मात्र 13 साल का ही है। उड़नदस्ता के सदस्य महेंद्र पाठक ने बताया कि शुरुआत में परिजन शादी से इंकार करते रहे, लेकिन मौके पर मौजूद तैयारियों और खूफिया इनपट से सबकुछ स्पष्ट था।

भविष्य के लिए सरकारी योजना का आश्वासन

इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी देकर संभावित सजा के बारे में बताया। समझाइश के बाद परिवार ने स्पष्ट किया कि वे बच्चों की पूरी उम्र होने तक विवाह नहीं करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि जिन बालक-बालिकाओं के विवाह कम उम्र के कारण रुकवाए गए हैं, उनके बालिग होने पर परिवार की सहमति से कन्यादान योजना के तहत विवाह कराया जाएगा, जिससे परिवार को आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंह ने बताया कि जिले में चल रहे जागरूकता अभियान के चलते शिकायतों में तेजी आई है और हर सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

अक्षय तृतीया पर भोजन करेंगे मेहमान

फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी महेंद्र पाठक ने बताया कि हमें बाल विवाह की सूचना मिली थी। शुक्रवार को हल्दी का कार्यक्रम था। मौके पर पहुंचे और परिजन को समझाया। समझाइश पर वे मान गए, लेकिन उनका कहना था कि शादी के कार्ड बंट चुके हैं। ऐसे में हमने अक्षय तृतीया के दिन मेहमानों को भोजन कराने की अनुमति दी है। साथ ही जब तक लड़का बालिग नहीं हो जाता, वो हर रोज आंगनबाड़ी जाकर हाजिरी दर्ज कराएगा।

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