बिच्छू काटने से 13 साल के बच्चे की मौत:जमुई में परिवारवालों ने निजी अस्पताल पर लापरवाही का लगाया आरोप; 2 घंटे जाम रहा जमुई-सिकंदरा मार्ग

बिच्छू काटने से 13 साल के बच्चे की मौत:जमुई में परिवारवालों ने निजी अस्पताल पर लापरवाही का लगाया आरोप; 2 घंटे जाम रहा जमुई-सिकंदरा मार्ग

जमुई-सिकंदरा मुख्य मार्ग स्थित एक निजी क्लीनिक में 13 साल के बच्चे की मौत के बाद रविवार को जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही और पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए करीब दो घंटे तक सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर जाम हटवाया। मृतक की पहचान टाउन थाना क्षेत्र के नर्मदा गांव निवासी मिथिलेश कुमार के रूप में हुई है। वह अजय रजक का भतीजा बताया गया है। परिजनों के मुताबिक शनिवार देर रात मिथिलेश को बिच्छू ने काट लिया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जमुई स्थित नारायण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ‘पहले 75 हजार जमा कराए, फिर दोबारा मांगे पैसे’ मृतक के चाचा अजय रजक ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि भर्ती के समय डॉक्टरों ने पहले 75 हजार रुपए जमा करवाए। इसके बाद रविवार दोपहर फिर से 75 हजार रुपए जमा करने की मांग की गई। परिजनों का आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद बच्चे का समुचित इलाज नहीं किया गया। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो अस्पताल प्रबंधन ने उसे दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन जब बच्चे को दूसरे अस्पताल लेकर पहुंचे, तब वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही फूटा लोगों का गुस्सा बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमुई-सिकंदरा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल के रजिस्ट्रेशन और वहां कार्यरत डॉक्टरों के प्रमाण पत्रों की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि इस अस्पताल में लापरवाही से मौत का यह तीसरा मामला है। ऐसे में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत इधर अस्पताल की डॉक्टर कविता कुमारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे को रविवार सुबह करीब तीन बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसकी स्थिति पहले से ही गंभीर थी। डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय बच्चे का ब्लड प्रेशर और पल्स रेट काफी अधिक था। उन्होंने दावा किया कि परिजन बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लाने में पहले ही काफी देर कर चुके थे। हालांकि जब पत्रकारों ने डॉक्टर से पूछा कि बिच्छू काटने के बाद बच्चे को कौन-कौन सी दवाएं दी गई थीं, तो वह स्पष्ट जवाब देने से बचती नजर आईं। कई बार सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उस समय अस्पताल में जो दवाएं उपलब्ध थीं, वही दी गईं। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे को सलाइन और “पेन आईविल” नामक दवा दी गई थी। इस दौरान डॉक्टर और पत्रकारों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसका वीडियो वहां मौजूद लोगों ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। पुलिस ने समझाकर हटवाया जाम घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत और समझाने-बुझाने के बाद लोगों ने सड़क जाम हटाया। इसके बाद मुख्य मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जमुई-सिकंदरा मुख्य मार्ग स्थित एक निजी क्लीनिक में 13 साल के बच्चे की मौत के बाद रविवार को जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही और पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए करीब दो घंटे तक सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर जाम हटवाया। मृतक की पहचान टाउन थाना क्षेत्र के नर्मदा गांव निवासी मिथिलेश कुमार के रूप में हुई है। वह अजय रजक का भतीजा बताया गया है। परिजनों के मुताबिक शनिवार देर रात मिथिलेश को बिच्छू ने काट लिया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए जमुई स्थित नारायण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ‘पहले 75 हजार जमा कराए, फिर दोबारा मांगे पैसे’ मृतक के चाचा अजय रजक ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि भर्ती के समय डॉक्टरों ने पहले 75 हजार रुपए जमा करवाए। इसके बाद रविवार दोपहर फिर से 75 हजार रुपए जमा करने की मांग की गई। परिजनों का आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद बच्चे का समुचित इलाज नहीं किया गया। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो अस्पताल प्रबंधन ने उसे दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन जब बच्चे को दूसरे अस्पताल लेकर पहुंचे, तब वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही फूटा लोगों का गुस्सा बच्चे की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमुई-सिकंदरा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल के रजिस्ट्रेशन और वहां कार्यरत डॉक्टरों के प्रमाण पत्रों की जांच कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि इस अस्पताल में लापरवाही से मौत का यह तीसरा मामला है। ऐसे में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत इधर अस्पताल की डॉक्टर कविता कुमारी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे को रविवार सुबह करीब तीन बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसकी स्थिति पहले से ही गंभीर थी। डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय बच्चे का ब्लड प्रेशर और पल्स रेट काफी अधिक था। उन्होंने दावा किया कि परिजन बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लाने में पहले ही काफी देर कर चुके थे। हालांकि जब पत्रकारों ने डॉक्टर से पूछा कि बिच्छू काटने के बाद बच्चे को कौन-कौन सी दवाएं दी गई थीं, तो वह स्पष्ट जवाब देने से बचती नजर आईं। कई बार सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उस समय अस्पताल में जो दवाएं उपलब्ध थीं, वही दी गईं। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे को सलाइन और “पेन आईविल” नामक दवा दी गई थी। इस दौरान डॉक्टर और पत्रकारों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसका वीडियो वहां मौजूद लोगों ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। पुलिस ने समझाकर हटवाया जाम घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत और समझाने-बुझाने के बाद लोगों ने सड़क जाम हटाया। इसके बाद मुख्य मार्ग पर यातायात सामान्य हो सका। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।  

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