जमीन घोटाले पर डीएम की बड़ी कार्रवाई, तहसीलदार हटे, कानूनगो और लेखपाल सस्पेंड

जमीन घोटाले पर डीएम की बड़ी कार्रवाई, तहसीलदार हटे, कानूनगो और लेखपाल सस्पेंड

बरेली। सरकारी जमीन को निजी लोगों के नाम चढ़ाने के खेल पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया। नवाबगंज तहसील के ज्योरा मकरन्दपुर गांव में सरकारी भूमि को खुर्द-बुर्द करने और फर्जी तरीके से अमलदरामद कराने के मामले में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बड़ी कार्रवाई कर दी। तहसीलदार को कुर्सी से हटा दिया गया, जबकि कानूनगो और लेखपाल को सस्पेंड कर दिया गया। कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

जांच में सामने आया कि गांव में वर्ष 2013 में हुए पट्टों में बड़ा खेल किया गया। खासतौर पर पट्टा नंबर-16 को लेकर अभिलेखों में कथित तौर पर फेरबदल किया गया। आरोप है कि मूल रिकॉर्ड की जगह फोटो कॉपी के आधार पर फाइल आगे बढ़ाई गई और प्राइवेट लोगों के पक्ष में अमलदरामद करा दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि धारा-38 की कार्रवाई में लेखपाल की रिपोर्ट तक नहीं लगी, लेकिन कानूनगो ने फाइल आगे बढ़ा दी। इसके बाद तहसीलदार ने भी बिना सही जांच-पड़ताल किए मामला उपजिलाधिकारी न्यायिक की अदालत में भेज दिया।

डीएम का एक्शन, तीन अफसर-कर्मचारी नापे गए

मामला सामने आते ही जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। तहसीलदार नवाबगंज दुष्यन्त प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से तहसील से हटाकर कलेक्ट्रेट मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। वहीं कानूनगो श्याम सुन्दर गुप्ता और लेखपाल रामचन्द्र को निलंबित कर दिया गया। डीएम की इस कार्रवाई के बाद तहसील और राजस्व विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

मुख्यमंत्री के आदेश का हवाला, दी सख्त चेतावनी

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने साफ कहा कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कराने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी ऐसे मामलों में दो बार निलंबित पाया जाता है तो उसके खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होगी। उपजिलाधिकारी नवाबगंज की रिपोर्ट के बाद यह कार्रवाई हुई है। प्रशासन अब पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करा रहा है। माना जा रहा है कि पुराने पट्टों और जमीन संबंधी कई और फाइलों की जांच शुरू हो सकती है। अगर जांच आगे बढ़ी तो राजस्व विभाग के कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

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