सेवा ही जिनका संकल्प और ‘राष्ट्र प्रथम’ ही सर्वोच्च प्रेरणा

सेवा ही जिनका संकल्प और ‘राष्ट्र प्रथम’ ही सर्वोच्च प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरा होना समय संदर्भ भर नहीं है। यह जनता की सेवा से राष्ट्रसेवा के संकल्प की पूर्णाहुति का स्वस्ति-स्मरण है। उनका जीवन इस रूप में सदा ही आकर्षित करता रहा है कि जन भावनाओं को समझते हुए उन्होंने निरंतर महत्वपूर्ण निर्णय ही नहीं लिए बल्कि उन्हें दृढ़ रहते सदा पूरा किया।राजनीति में रहते हुए उसकी बुराइयों से वह सदा दूर रहे। साधारण परिवार से आते हुए भी देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने की उनकी जीवन यात्रा कठिन परिश्रम, शुचिता और जनसेवा का अप्रतिम उदाहरण है। प्रधानमंत्री के रूप में ईमानदारी और नैतिक जीवन से जुड़े आदर्श मूल्यों का उनका जीवन इस बात का भी संदेश है कि राजनीति में पद महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि सेवा ही असली ध्येय है। भाजपा इसलिए ही प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन की 25 वर्ष की यात्रा को ‘सेवा ही संकल्प, राष्ट्र प्रथम ही प्रेरणा’ के रूप में मना रही है।

मोदी जी की राजनीति जीवन यात्रा ने भारत को विश्व पटल पर आर्थिक, रणनीतिक और सामरिक महाशक्ति के रूप में ही स्थापित नहीं किया है, बल्कि भारत को नई शिक्षा नीति से जोड़ते हमारी समृद्ध ज्ञान-परंपरा के महान केंद्र के रूप में स्थापित किया है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सात अक्टूबर, 2001 को उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। तीन बार वह गुजरात के मुख्यमंत्री बने और फिर प्रधानमंत्री का पदभार संभाला। इस दौरान जनसेवा से राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते ‘नागरिक देवो भव:’ की महान सोच भी राजनीति में दी है। मैंने उनके इस सार्वजनिक जीवन को करीब से देखा और अनुभूत किया है। गरीब परिवार में वह पले-बढ़े और आरंभ से ही कठिनाइयों को देखा। शायद इसीलिए कठोर श्रम के साथ संघर्ष का जीवन जीने वाले लोगों की पीड़ा वह अधिक गहरे से समझते रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जब पदभार ग्रहण किया तो उनकी पहली प्राथमिकता यही थी कि कैसे कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए कार्य हो। राजनीतिक जीवन में शुचिता से कार्य करने के साथ ही सबको साथ लेकर, सबको सम्मान देते हुए कार्य करने की मोदी जी की नीति आरंभ से ही सेवा से संकल्प सिद्धि की रही है। तेरह वर्ष तक गुजरात के लगातार मुख्यमंत्री रहने के बाद 26 मई 2014 को वह देश के 14 वें प्रधानमंत्री बने। निर्णय लेना और फिर उस पर पूरी प्रतिबद्धता से काम करने की उनकी नीति के कारण ही आजादी के बाद से देश की लंबित समस्याओं का तेजी से निराकरण ही नहीं हुआ, बल्कि बहुत से ऐसे ऐतिहासिक निर्णय हुए जो पहले कभी नहीं हुए।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय हो या काले धन पर रोक लगाने के लिए बड़े नोटों को बंद करने की उनकी नीति या फिर डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं को बढ़ावा देने के उनके निर्णयों से ही देश तेजी से विकास की ओर आगे बढ़ा। जब उन्होंने जन धन योजना लागू की तो सब हैरान थे कि यह लुभावनी योजना है, लेकिन बहुत जल्दी ही इस योजना के जरिये विशेष रूप से वंचित समुदाय को बड़े स्तर पर लाभान्वित ही नहीं किया गया। वित्तीय समावेशन के लिए भारत की इस योजना से राष्ट्रीय मिशन के रूप में ही पहचान ही नहीं बनी, बल्कि वंचित नागरिकों को ऋण, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान से जोड़ उनके आर्थिक सशक्तीकरण की राह प्रशस्त हुई। उनके नेतृत्व में देश में कृषि में उत्पादकता में तेजी से वृद्धि हुई है। रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में देश ने लंबी छलांग लगाई है। मोदी जी के कार्यकाल में हुए निर्णयों में उनकी राष्ट्रवादी सोच की प्रखर दृष्टि समाई हुई है। वह भविष्य की जरूरतों को भांपकर कड़े और बड़े फैसले लेने वाले राजनीतिज्ञ हैं। सेवा ही उनका संकल्प है, राष्ट्र प्रथम उनकी प्रेरणा है।

अजेय कुमार,(वरिष्ठ राजनेता)

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *