साइबर ठगी के लिए फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनमें रकम ट्रांसफर कराने और एटीएम से निकालने के मामले में पुलिस ने आशुतोष को गिरफ्तार किया था। आशुतोष शर्मा की जमानत अर्जी सेशन कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी। अब जेल से बाहर आने के लिए उसे हाईकोर्ट का रुख करना होगा। फिलहाल आशुतोष जेल में ही रहेगा। 18 सितंबर को हुई थी गिरफ्तारी साइबर क्राइम थाना प्रभारी संजय कुमार की टीम ने 18 सितंबर को साइबर ठगी से जुड़े मामले में आशुतोष शर्मा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 19 सितंबर को एसपी अनिल सिंह सिसौदिया ने मामले का खुलासा किया था। आशुतोष बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र के पटेल विहार का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से तीन आईफोन, छह एंड्रॉयड मोबाइल, सात एटीएम कार्ड, 29 सिम कार्ड, दो चेकबुक, 11 बैंक अकाउंट किट, एक लैपटॉप, बायोमैट्रिक डिवाइस और 1.13 लाख रुपए नकद बरामद किए गए थे। आधार के नाम पर खुलवाते थे खाते मामले की शुरुआत रामपुर के पसियापुरा निवासी मधु की शिकायत से हुई थी। उन्होंने एसपी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया था कि उनके नाम से फर्जी बैंक खाता खोलकर साइबर फ्रॉड की रकम का लेन-देन किया गया। जांच में पुलिस को फर्जी तरीके से एनएसडीएल पेमेंट बैंक खाते खोलने और उनमें साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने की जानकारी मिली। एसपी के मुताबिक, आरोपी आम लोगों के आधार कार्ड बनवाने या अपडेट कराने के नाम पर ई-केवाईसी के जरिए उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों को सक्रिय कर साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती और एटीएम के जरिए निकाली जाती थी। साइबर ठगी की रकम को USDT में लगाने का आरोप पुलिस का आरोप है कि फर्जी तरीके से खोले गए बैंक खाते आशुतोष शर्मा और एक अन्य आरोपी को उपलब्ध कराए जाते थे। इन खातों में आने वाली साइबर ठगी की रकम का इस्तेमाल यूएसडीटी में किया जाता था। मामले में एक अन्य आरोपी अमन खान अभी वांछित बताया गया है। सुबह दाखिल हुई जमानत अर्जी, दोपहर में खारिज आशुतोष की ओर से बुधवार सुबह करीब 11 बजे सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। कोर्ट ने दोपहर करीब 3 बजे अर्जी खारिज कर दी। ADGC सौरभ कुमार ने इसकी जानकारी दी।

