धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में आज मौसम के कड़े मिजाज और भारी बारिश के बावजूद दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध दैनिक गंगा आरती पूरी भव्यता और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुई। गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित होने वाली इस आरती की निरंतरता मूसलाधार बारिश के बीच भी अटूट रही, जिसने काशी की अटूट आस्था और सांस्कृतिक दृढ़ता को एक बार फिर दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। बाढ़ की वजह से गंगा सेवा निधि के कार्यालय पर होने वाली इस आरती में भी श्रद्धालु मुस्तैद रहे और उन्होंने भगवान इंद्र के द्वारा मां गंगे के अभिषेक के साथ गंगा आरती देख मां से आशीर्वाद लिया। तेज बारिश में भी डटे रहे देश-विदेश के श्रद्धालु
शाम होते ही वाराणसी में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश शुरू हो गई। लेकिन मां गंगा की आरती का साक्षी बनने आए श्रद्धालुओं के कदम पीछे नहीं हटे। घाट पर मौजूद सैकड़ों देशी-विदेशी सैलानी और स्थानीय लोग अपनी जगह पर डटे रहे। तेज बौछारों के बीच जब शंखनाद और डमरुओं की गूंज के साथ आरती शुरू हुई, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और बारिश पर आस्था भारी पड़ती दिखाई दी। अर्चकों ने सेवा भाव से पूरी की आरती की रस्में
गंगा सेवा निधि के अर्चकों ने भी भारी बरसात की परवाह न करते हुए पूरी निष्ठा के साथ मां गंगा का पूजन, अर्चन और महाआरती संपन्न कराई। तेज बारिश के बीच पीतल के बड़े दीपों को संभालते हुए अर्चकों द्वारा की जा रही आरती का दृश्य बेहद विहंगम और अलौकिक लग रहा था। गंगा सेवा निधि के पदाधिकारियों ने बताया कि चाहे कैसी भी परिस्थिति या मौसम हो, दैनिक गंगा आरती का क्रम कभी नहीं रुकता है और आज भी पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ इस दिव्य परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

