आर्य समाज मोतिहारी की गौरवशाली यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शताब्दी समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह को ऐतिहासिक और भव्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। आयोजन के दौरान हवन-यज्ञ, भजन, प्रवचन, वैदिक कार्यक्रमों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से विद्वानों के पहुंचने की संभावना है। वहीं, शताब्दी समारोह के अवसर पर आर्य समाज परिसर में नवनिर्मित भव्य मंदिर का उद्घाटन भी किया जाएगा। शताब्दी समारोह की तैयारियों और कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए आर्य समाज परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें आर्य समाज के प्रधान धर्मवर्धन प्रसाद, वर्तमान मंत्री मोदेश्वर प्रसाद, पूर्व मंत्री डॉ. मनीषा प्रसाद आर्या, रंजना आर्या, प्रभाती देवी, कमलेश कुमार, दिवेश चंद्र आर्य समेत कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। 100 वर्षों की यात्रा को यादगार बनाने की तैयारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्य समाज के प्रधान धर्मवर्धन प्रसाद ने संस्था की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्य समाज मोतिहारी ने अपने लंबे सफर में समाज सुधार, शिक्षा, संस्कार और वैदिक विचारों को आगे बढ़ाने का काम किया है। अब संस्था के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाला शताब्दी समारोह इस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। उन्होंने बताया कि समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन में देश के अलग-अलग स्थानों से विद्वानों और वैदिक विचारकों के शामिल होने की संभावना है। समारोह के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आर्य समाज के विचारों और सिद्धांतों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। जयपुर से बनकर आया भव्य मंदिर, समारोह में होगा उद्घाटन शताब्दी समारोह के दौरान आर्य समाज परिसर में नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन भी किया जाएगा। दिवेश चंद्र आर्य ने बताया कि यह मंदिर विशेष रूप से जयपुर में तैयार कराया गया है। मंदिर की स्थापत्य कला और भव्य स्वरूप इसे परिसर में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाएगा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के लिए 100 वर्ष पूरे होना गौरव का अवसर है। इसी ऐतिहासिक मौके पर मंदिर का उद्घाटन समारोह की महत्वपूर्ण कड़ी होगी। मंदिर निर्माण के जरिए परिसर को नया स्वरूप देने के साथ धार्मिक और वैदिक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है। सुबह हवन-यज्ञ से शुरुआत, दोपहर में निकलेगी शोभायात्रा पूर्व मंत्री डॉ. मनीषा प्रसाद आर्या ने समारोह के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि शताब्दी समारोह को तीन सत्रों में आयोजित किया जाएगा। प्रथम सत्र की शुरुआत सुबह 8 बजे हवन-यज्ञ के साथ होगी। इसके बाद दोपहर 1 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में आर्य समाज से जुड़े पदाधिकारी, सदस्य और श्रद्धालु शामिल होंगे। इसके माध्यम से वैदिक संस्कृति और आर्य समाज के विचारों का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद सायंकालीन सत्र में हवन, भजन और प्रवचन का आयोजन होगा। समारोह में शामिल होने वाले विद्वानों और वक्ताओं द्वारा आर्य समाज के सिद्धांतों, वैदिक संस्कृति और समाज सुधार के विषय पर विचार रखे जाएंगे। गुरुकुल के विद्यार्थी देंगे वैदिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां समारोह में गुरुकुल से आए विद्यार्थी भी विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। विद्यार्थी वैदिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इसके जरिए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार समारोह में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश को भी प्रमुखता दी जाएगी। कार्यक्रम में आने वाले लोगों को आर्य समाज के इतिहास और उसकी गतिविधियों से भी अवगत कराया जाएगा। महिला शिक्षा और सशक्तीकरण पर भी रहेगा जोर डॉ. मनीषा प्रसाद आर्या ने कहा कि आर्य समाज की सौ वर्षों की यात्रा केवल एक संस्था का इतिहास नहीं है, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा, सत्य, वेद ज्ञान और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी प्रेरणादायक यात्रा है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने महिलाओं की शिक्षा, समान अधिकार और सम्मान के लिए वैचारिक क्रांति की। आर्य समाज ने भी इन विचारों को समाज तक पहुंचाने और महिलाओं को शिक्षा व सम्मान का अधिकार दिलाने की दिशा में लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह का उद्देश्य केवल आर्य समाज के पिछले 100 वर्षों को याद करना नहीं है। इसके जरिए नई पीढ़ी को आर्य समाज के मूल सिद्धांतों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएंगे आर्य समाज के सिद्धांत आयोजकों ने कहा कि आज के समय में समाज में सत्य, संस्कार, शिक्षा और सेवा की भावना को मजबूत करने की जरूरत है। शताब्दी समारोह इसी दिशा में एक प्रयास है। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं और नई पीढ़ी को वैदिक विचारों से जोड़ने के साथ समाज सेवा और महिला सशक्तीकरण का संदेश भी दिया जाएगा। आर्य समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि समारोह को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्तर पर तैयारी की जा रही है। सौ वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद आयोजित होने वाला यह समारोह आर्य समाज मोतिहारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा। आर्य समाज मोतिहारी की गौरवशाली यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शताब्दी समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह को ऐतिहासिक और भव्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। आयोजन के दौरान हवन-यज्ञ, भजन, प्रवचन, वैदिक कार्यक्रमों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से विद्वानों के पहुंचने की संभावना है। वहीं, शताब्दी समारोह के अवसर पर आर्य समाज परिसर में नवनिर्मित भव्य मंदिर का उद्घाटन भी किया जाएगा। शताब्दी समारोह की तैयारियों और कार्यक्रमों की जानकारी देने के लिए आर्य समाज परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें आर्य समाज के प्रधान धर्मवर्धन प्रसाद, वर्तमान मंत्री मोदेश्वर प्रसाद, पूर्व मंत्री डॉ. मनीषा प्रसाद आर्या, रंजना आर्या, प्रभाती देवी, कमलेश कुमार, दिवेश चंद्र आर्य समेत कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। 100 वर्षों की यात्रा को यादगार बनाने की तैयारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्य समाज के प्रधान धर्मवर्धन प्रसाद ने संस्था की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्य समाज मोतिहारी ने अपने लंबे सफर में समाज सुधार, शिक्षा, संस्कार और वैदिक विचारों को आगे बढ़ाने का काम किया है। अब संस्था के सौ वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाला शताब्दी समारोह इस यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। उन्होंने बताया कि समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन में देश के अलग-अलग स्थानों से विद्वानों और वैदिक विचारकों के शामिल होने की संभावना है। समारोह के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आर्य समाज के विचारों और सिद्धांतों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा। जयपुर से बनकर आया भव्य मंदिर, समारोह में होगा उद्घाटन शताब्दी समारोह के दौरान आर्य समाज परिसर में नवनिर्मित मंदिर का उद्घाटन भी किया जाएगा। दिवेश चंद्र आर्य ने बताया कि यह मंदिर विशेष रूप से जयपुर में तैयार कराया गया है। मंदिर की स्थापत्य कला और भव्य स्वरूप इसे परिसर में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाएगा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के लिए 100 वर्ष पूरे होना गौरव का अवसर है। इसी ऐतिहासिक मौके पर मंदिर का उद्घाटन समारोह की महत्वपूर्ण कड़ी होगी। मंदिर निर्माण के जरिए परिसर को नया स्वरूप देने के साथ धार्मिक और वैदिक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का प्रयास किया गया है। सुबह हवन-यज्ञ से शुरुआत, दोपहर में निकलेगी शोभायात्रा पूर्व मंत्री डॉ. मनीषा प्रसाद आर्या ने समारोह के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि शताब्दी समारोह को तीन सत्रों में आयोजित किया जाएगा। प्रथम सत्र की शुरुआत सुबह 8 बजे हवन-यज्ञ के साथ होगी। इसके बाद दोपहर 1 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में आर्य समाज से जुड़े पदाधिकारी, सदस्य और श्रद्धालु शामिल होंगे। इसके माध्यम से वैदिक संस्कृति और आर्य समाज के विचारों का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद सायंकालीन सत्र में हवन, भजन और प्रवचन का आयोजन होगा। समारोह में शामिल होने वाले विद्वानों और वक्ताओं द्वारा आर्य समाज के सिद्धांतों, वैदिक संस्कृति और समाज सुधार के विषय पर विचार रखे जाएंगे। गुरुकुल के विद्यार्थी देंगे वैदिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां समारोह में गुरुकुल से आए विद्यार्थी भी विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। विद्यार्थी वैदिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। इसके जरिए नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार समारोह में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश को भी प्रमुखता दी जाएगी। कार्यक्रम में आने वाले लोगों को आर्य समाज के इतिहास और उसकी गतिविधियों से भी अवगत कराया जाएगा। महिला शिक्षा और सशक्तीकरण पर भी रहेगा जोर डॉ. मनीषा प्रसाद आर्या ने कहा कि आर्य समाज की सौ वर्षों की यात्रा केवल एक संस्था का इतिहास नहीं है, बल्कि समाज सुधार, शिक्षा, सत्य, वेद ज्ञान और महिला सशक्तीकरण से जुड़ी प्रेरणादायक यात्रा है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने महिलाओं की शिक्षा, समान अधिकार और सम्मान के लिए वैचारिक क्रांति की। आर्य समाज ने भी इन विचारों को समाज तक पहुंचाने और महिलाओं को शिक्षा व सम्मान का अधिकार दिलाने की दिशा में लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह का उद्देश्य केवल आर्य समाज के पिछले 100 वर्षों को याद करना नहीं है। इसके जरिए नई पीढ़ी को आर्य समाज के मूल सिद्धांतों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएंगे आर्य समाज के सिद्धांत आयोजकों ने कहा कि आज के समय में समाज में सत्य, संस्कार, शिक्षा और सेवा की भावना को मजबूत करने की जरूरत है। शताब्दी समारोह इसी दिशा में एक प्रयास है। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं और नई पीढ़ी को वैदिक विचारों से जोड़ने के साथ समाज सेवा और महिला सशक्तीकरण का संदेश भी दिया जाएगा। आर्य समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि समारोह को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्तर पर तैयारी की जा रही है। सौ वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद आयोजित होने वाला यह समारोह आर्य समाज मोतिहारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

