मऊगंज जिले में सोमवार शाम ‘आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन (सीटू)’ के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जमकर प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री और महिला व बाल विकास मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मानदेय कटौती बंद करने, संपर्क ऐप को खत्म करने और सरकारी कर्मचारी घोषित करने जैसी कई प्रमुख मांगें रखीं। नेटवर्क न रहने पर भी कट रहा मानदेय यूनियन का आरोप है कि पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप पर एक जैसा काम करने से बोझ बढ़ गया है। ग्रामीण व पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क न रहने से ऐप में काम दर्ज नहीं हो पाता। इसके बाद भी 7 से 15 दिन तक का मानदेय काट लिया जाता है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि मानदेय को किसी भी ऐप या ऑनलाइन हाजिरी से न जोड़ा जाए और खराब मोबाइलों की जगह टैबलेट या लैपटॉप दिए जाएं। ओटीपी और फेस स्कैन की शर्त हटाने की मांग कार्यकर्ताओं ने टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण में फेस स्कैन और ओटीपी की अनिवार्यता को अव्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि कई हितग्राहियों के पास मोबाइल या आधार लिंक नंबर नहीं हैं, तो कुछ ठगी के डर से ओटीपी नहीं देते, जिससे जरूरतमंद बच्चे और महिलाएं पोषण आहार से वंचित रह जाते हैं। 3 से 6 साल के बच्चों को स्कूल भेजने के आदेश का विरोध यूनियन ने मांग रखी कि 3 से 6 साल के बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने का आदेश रद्द किया जाए और आंगनबाड़ी केंद्रों में ही केजी-1 व केजी-2 की पढ़ाई शुरू हो। इससे आंगनबाड़ियों में बच्चों की संख्या घटने से रोकी जा सकेगी। 41 हजार रुपए मानदेय और 65 वर्ष रिटायरमेंट उम्र की मांग ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने तक कार्यकर्ता को 41 हजार और सहायिका को 32 हजार रुपए मानदेय देने की मांग की। इसके अलावा 12 हजार पेंशन, 65 वर्ष की रिटायरमेंट उम्र, गर्मी की 1 महीने की छुट्टी और भवनों में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

