सुपौल जिला जदयू कार्यालय में शुक्रवार को पिपरा विधायक रामविलास कामत ने ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के तहत फरक्का जल संधि को लेकर प्रेस वार्ता की। उन्होंने केंद्र सरकार से दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही भारत-बांग्लादेश फरक्का जल संधि के नवीनीकरण पर बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार करने की मांग की। फरक्का बराज को बताया बाढ़ की प्रमुख वजह रामविलास कामत ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में लगातार गाद जमा हो रही है। इससे नदी का तल ऊंचा हो रहा है और पानी का प्राकृतिक प्रवाह भी प्रभावित हुआ है। बारिश या जलस्तर बढ़ने पर गंगा का पानी तेजी से खतरे के निशान के आसपास पहुंच जाता है, जिसका असर उत्तर बिहार के गंगा किनारे बसे जिलों पर पड़ता है। बिहार में आने जितना पानी, उतना आगे छोड़ा जाए विधायक ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में लोगों को फरक्का जल संधि के प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जदयू की मांग है कि बिहार में गंगा में जितना पानी प्रवेश करता है, उतनी ही मात्रा में पानी आगे छोड़ा जाए। कोसी समेत अन्य नदियों के पानी के उपयोग की मांग उन्होंने कहा कि कोसी समेत बिहार की अन्य नदियों के जल का उपयोग राज्य की जरूरतों के अनुसार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सिंचाई, पेयजल और विकास कार्यों में किया जा सकता है। 12 दिसंबर 1996 को हुई थी संधि कामत ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 वर्षों के लिए फरक्का जल संधि हुई थी। इसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। उन्होंने दावा किया कि संधि के कारण बिहार को तीन दशकों से पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। नीतीश कुमार भी उठा चुके हैं मुद्दा विधायक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार फरक्का बराज से बिहार को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठा चुके हैं। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी राज्यसभा में फरक्का जल संधि को बिहार के हित में नहीं होने की बात कही है। प्रेस वार्ता में जदयू जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अमर कुमार चौधरी समेत कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सुपौल जिला जदयू कार्यालय में शुक्रवार को पिपरा विधायक रामविलास कामत ने ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के तहत फरक्का जल संधि को लेकर प्रेस वार्ता की। उन्होंने केंद्र सरकार से दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही भारत-बांग्लादेश फरक्का जल संधि के नवीनीकरण पर बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार करने की मांग की। फरक्का बराज को बताया बाढ़ की प्रमुख वजह रामविलास कामत ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गंगा नदी में लगातार गाद जमा हो रही है। इससे नदी का तल ऊंचा हो रहा है और पानी का प्राकृतिक प्रवाह भी प्रभावित हुआ है। बारिश या जलस्तर बढ़ने पर गंगा का पानी तेजी से खतरे के निशान के आसपास पहुंच जाता है, जिसका असर उत्तर बिहार के गंगा किनारे बसे जिलों पर पड़ता है। बिहार में आने जितना पानी, उतना आगे छोड़ा जाए विधायक ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से गंगा किनारे स्थित जिलों में लोगों को फरक्का जल संधि के प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जदयू की मांग है कि बिहार में गंगा में जितना पानी प्रवेश करता है, उतनी ही मात्रा में पानी आगे छोड़ा जाए। कोसी समेत अन्य नदियों के पानी के उपयोग की मांग उन्होंने कहा कि कोसी समेत बिहार की अन्य नदियों के जल का उपयोग राज्य की जरूरतों के अनुसार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सिंचाई, पेयजल और विकास कार्यों में किया जा सकता है। 12 दिसंबर 1996 को हुई थी संधि कामत ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 वर्षों के लिए फरक्का जल संधि हुई थी। इसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। उन्होंने दावा किया कि संधि के कारण बिहार को तीन दशकों से पर्यावरणीय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। नीतीश कुमार भी उठा चुके हैं मुद्दा विधायक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार फरक्का बराज से बिहार को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठा चुके हैं। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी राज्यसभा में फरक्का जल संधि को बिहार के हित में नहीं होने की बात कही है। प्रेस वार्ता में जदयू जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अमर कुमार चौधरी समेत कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

