‘प्रशांत किशोर बेचारा है’ सम्राट चौधरी का PK पर तंज:कहा- मेरे खिलाफ कुछ है तो कोर्ट जाइए, बांकीपुर हार पर माना- हमसे गलती हुई, सुधार करेंगे

‘प्रशांत किशोर बेचारा है’ सम्राट चौधरी का PK पर तंज:कहा- मेरे खिलाफ कुछ है तो कोर्ट जाइए, बांकीपुर हार पर माना- हमसे गलती हुई, सुधार करेंगे

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को हराने वाले जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर पर बड़ा बयान दिया है। न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। वह व्यक्तिगत राजनीति में विश्वास नहीं रखते हैं। प्रशांत किशोर द्वारा लगातार उन पर किए जा रहे राजनीतिक और व्यक्तिगत हमलों के सवाल पर सम्राट चौधरी ने उन्हें ‘बेचारा’ बताते हुए कहा, ‘उन्हें जो करना है, करने दिया जाए।’ इंटरव्यू के दौरान बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार और प्रशांत किशोर द्वारा सम्राट चौधरी को मुख्य निशाना बनाए जाने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर मुख्यमंत्री ने साफ कहा, ‘वह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राजनीति नहीं करते, उनका ध्यान बिहार में काम करने पर है।’ मेरी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है – सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर उप चुनाव को भले ही उनके इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश की गई हो, लेकिन उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रशांत किशोर की ओर से पिछले कई महीनों से उनके खिलाफ किए जा रहे लगातार हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर ने कई राजनीतिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की शिक्षा, उनके नाम और पुराने मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं। मेरे खिलाफ कुछ है तो कोर्ट जाइए – सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस आरोप या सबूत है तो उसके लिए संवैधानिक और कानूनी रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अदालत जाने का अधिकार है और इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने आगे कहा, ‘संविधान हर व्यक्ति को न्यायालय जाने का अधिकार देता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना चाहता है तो उसे रोकने का कोई सवाल ही नहीं है।’ सीएम ने कहा, ‘आरोपों और राजनीतिक बयानों के बजाय किसी भी विवाद का फैसला कानून और अदालत के माध्यम से होना चाहिए। वह किसी को अदालत जाने से नहीं रोक रहे हैं और अंतिम फैसला अदालत को ही करने देना चाहिए।’ प्रशांत किशोर ने किन मुद्दों पर सम्राट चौधरी को घेरा? जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर पिछले लंबे समय से सम्राट चौधरी पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता, नाम और पुराने मामलों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रशांत किशोर के इन हमलों की शुरुआत सितंबर 2025 के दौरान अधिक तीखे रूप में सामने आई थी। उस दौरान उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सम्राट चौधरी पर 1995 के तारापुर हत्याकांड से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस मामले को लेकर कार्रवाई और पद से हटाए जाने की मांग भी की थी। इसके बाद प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के नाम और पहचान से जुड़े सवाल भी उठाए। उन्होंने उनके मूल नाम को लेकर टिप्पणी की और मैट्रिक की पढ़ाई तथा शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों और दावों पर सवाल खड़े किए। शिक्षा और हलफनामे को लेकर भी उठाते रहे सवाल प्रशांत किशोर ने कई बार सम्राट चौधरी की पढ़ाई को राजनीतिक मुद्दा बनाया। उन्होंने मैट्रिक परीक्षा, शैक्षणिक योग्यता और चुनावी हलफनामे में शिक्षा से जुड़े विवरणों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अलग-अलग दस्तावेजों और सार्वजनिक दावों में शिक्षा से संबंधित जानकारी को लेकर विरोधाभास है। प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी से जुड़े ‘डॉक्टरेट’ के दावों को लेकर भी सवाल खड़े किए। अप्रैल 2026 में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के आसपास और उसके बाद भी प्रशांत किशोर ने इन मुद्दों को लगातार अपनी राजनीतिक सभाओं और बयानों में उठाया। बांकीपुर चुनाव के दौरान सम्राट चौधरी बने प्रमुख निशाना बांकीपुर उपचुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपने प्रमुख राजनीतिक निशानों में रखा। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सरकार के नेतृत्व, मुख्यमंत्री की कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाए। उपचुनाव के बाद भी प्रशांत किशोर ने कहा था कि उनकी सम्राट चौधरी से कोई निजी लड़ाई नहीं है। हालांकि, उन्होंने उसी दौरान मुख्यमंत्री की पढ़ाई, कामकाज की भाषा और नेतृत्व क्षमता को लेकर फिर से सवाल उठाए थे। ‘चप्पल कांड’ विवाद के दौरान भी साधा था निशाना सितंबर 2026 में दिल्ली में सामने आए ‘चप्पल कांड’ विवाद के संदर्भ में भी प्रशांत किशोर ने बिना नाम लिए सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा, ‘जब सरकार के मुखिया का रिकॉर्ड ही सवालों के घेरे में हो तो मंत्रियों और विधायकों से इस तरह की घटनाओं की उम्मीद की जा सकती है।’ पीके के इस बयान को सीधे तौर पर सम्राट चौधरी पर राजनीतिक हमला माना गया। बांकीपुर में बीजेपी की हार पर सम्राट चौधरी ने मानी गलती ANI को दिए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी से चुनाव में गलती हुई है और बीजेपी इसके कारणों का आत्ममंथन कर रही है। एक सीट पूरे बिहार का जनादेश नहीं होती- सम्राट चौधरी हालांकि, मुख्यमंत्री ने बांकीपुर की हार को पूरे बिहार के राजनीतिक जनादेश से जोड़ने से इनकार किया। उपचुनाव में किसी एक सीट का परिणाम पूरे राज्य की राजनीतिक स्थिति को तय नहीं करता। बिहार में पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब उपचुनावों में सत्तारूढ़ दल को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की। सम्राट चौधरी ने 2005 के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए कहा, ‘नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद 2009 में हुए उपचुनावों में पार्टी को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस समय 17 उपचुनावों में से 12 सीटों पर हार हुई थी, लेकिन बाद के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 206 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की।’ पूरे बिहार का जनादेश अलग-अलग क्षेत्रों से तय होता है- सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का जनादेश किसी एक विधानसभा क्षेत्र से तय नहीं होता। राज्य के अलग-अलग सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक क्षेत्रों के मतदाताओं की राय मिलकर पूरे बिहार का राजनीतिक जनादेश बनाती है। बांकीपुर की हार के बाद बीजेपी के लिए चुनौती CM सम्राट चौधरी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हार के बाद सीधे तौर पर यह स्वीकार किया कि पार्टी को चुनावी रणनीति और संगठन के स्तर पर अपनी कमियों की समीक्षा करने की जरूरत है। बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार ने पार्टी को संगठन और चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि पार्टी से गलती हुई है और अब उस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की जीत ने जन सुराज को राजनीतिक रूप से नई ऊर्जा दी है। खासकर बांकीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लगातार निशाना बनाने के बाद मिली जीत को जन सुराज अपनी राजनीतिक रणनीति की सफलता के रूप में पेश कर सकती है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को हराने वाले जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर पर बड़ा बयान दिया है। न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। वह व्यक्तिगत राजनीति में विश्वास नहीं रखते हैं। प्रशांत किशोर द्वारा लगातार उन पर किए जा रहे राजनीतिक और व्यक्तिगत हमलों के सवाल पर सम्राट चौधरी ने उन्हें ‘बेचारा’ बताते हुए कहा, ‘उन्हें जो करना है, करने दिया जाए।’ इंटरव्यू के दौरान बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार और प्रशांत किशोर द्वारा सम्राट चौधरी को मुख्य निशाना बनाए जाने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर मुख्यमंत्री ने साफ कहा, ‘वह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ राजनीति नहीं करते, उनका ध्यान बिहार में काम करने पर है।’ मेरी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है – सम्राट चौधरी सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर उप चुनाव को भले ही उनके इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश की गई हो, लेकिन उनकी किसी से व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रशांत किशोर की ओर से पिछले कई महीनों से उनके खिलाफ किए जा रहे लगातार हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर ने कई राजनीतिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की शिक्षा, उनके नाम और पुराने मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं। मेरे खिलाफ कुछ है तो कोर्ट जाइए – सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस आरोप या सबूत है तो उसके लिए संवैधानिक और कानूनी रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अदालत जाने का अधिकार है और इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने आगे कहा, ‘संविधान हर व्यक्ति को न्यायालय जाने का अधिकार देता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना चाहता है तो उसे रोकने का कोई सवाल ही नहीं है।’ सीएम ने कहा, ‘आरोपों और राजनीतिक बयानों के बजाय किसी भी विवाद का फैसला कानून और अदालत के माध्यम से होना चाहिए। वह किसी को अदालत जाने से नहीं रोक रहे हैं और अंतिम फैसला अदालत को ही करने देना चाहिए।’ प्रशांत किशोर ने किन मुद्दों पर सम्राट चौधरी को घेरा? जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर पिछले लंबे समय से सम्राट चौधरी पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता, नाम और पुराने मामलों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रशांत किशोर के इन हमलों की शुरुआत सितंबर 2025 के दौरान अधिक तीखे रूप में सामने आई थी। उस दौरान उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सम्राट चौधरी पर 1995 के तारापुर हत्याकांड से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस मामले को लेकर कार्रवाई और पद से हटाए जाने की मांग भी की थी। इसके बाद प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के नाम और पहचान से जुड़े सवाल भी उठाए। उन्होंने उनके मूल नाम को लेकर टिप्पणी की और मैट्रिक की पढ़ाई तथा शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों और दावों पर सवाल खड़े किए। शिक्षा और हलफनामे को लेकर भी उठाते रहे सवाल प्रशांत किशोर ने कई बार सम्राट चौधरी की पढ़ाई को राजनीतिक मुद्दा बनाया। उन्होंने मैट्रिक परीक्षा, शैक्षणिक योग्यता और चुनावी हलफनामे में शिक्षा से जुड़े विवरणों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अलग-अलग दस्तावेजों और सार्वजनिक दावों में शिक्षा से संबंधित जानकारी को लेकर विरोधाभास है। प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी से जुड़े ‘डॉक्टरेट’ के दावों को लेकर भी सवाल खड़े किए। अप्रैल 2026 में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के आसपास और उसके बाद भी प्रशांत किशोर ने इन मुद्दों को लगातार अपनी राजनीतिक सभाओं और बयानों में उठाया। बांकीपुर चुनाव के दौरान सम्राट चौधरी बने प्रमुख निशाना बांकीपुर उपचुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपने प्रमुख राजनीतिक निशानों में रखा। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सरकार के नेतृत्व, मुख्यमंत्री की कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाए। उपचुनाव के बाद भी प्रशांत किशोर ने कहा था कि उनकी सम्राट चौधरी से कोई निजी लड़ाई नहीं है। हालांकि, उन्होंने उसी दौरान मुख्यमंत्री की पढ़ाई, कामकाज की भाषा और नेतृत्व क्षमता को लेकर फिर से सवाल उठाए थे। ‘चप्पल कांड’ विवाद के दौरान भी साधा था निशाना सितंबर 2026 में दिल्ली में सामने आए ‘चप्पल कांड’ विवाद के संदर्भ में भी प्रशांत किशोर ने बिना नाम लिए सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा, ‘जब सरकार के मुखिया का रिकॉर्ड ही सवालों के घेरे में हो तो मंत्रियों और विधायकों से इस तरह की घटनाओं की उम्मीद की जा सकती है।’ पीके के इस बयान को सीधे तौर पर सम्राट चौधरी पर राजनीतिक हमला माना गया। बांकीपुर में बीजेपी की हार पर सम्राट चौधरी ने मानी गलती ANI को दिए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी से चुनाव में गलती हुई है और बीजेपी इसके कारणों का आत्ममंथन कर रही है। एक सीट पूरे बिहार का जनादेश नहीं होती- सम्राट चौधरी हालांकि, मुख्यमंत्री ने बांकीपुर की हार को पूरे बिहार के राजनीतिक जनादेश से जोड़ने से इनकार किया। उपचुनाव में किसी एक सीट का परिणाम पूरे राज्य की राजनीतिक स्थिति को तय नहीं करता। बिहार में पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब उपचुनावों में सत्तारूढ़ दल को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की। सम्राट चौधरी ने 2005 के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए कहा, ‘नीतीश कुमार के सत्ता में आने के बाद 2009 में हुए उपचुनावों में पार्टी को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस समय 17 उपचुनावों में से 12 सीटों पर हार हुई थी, लेकिन बाद के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 206 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की।’ पूरे बिहार का जनादेश अलग-अलग क्षेत्रों से तय होता है- सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का जनादेश किसी एक विधानसभा क्षेत्र से तय नहीं होता। राज्य के अलग-अलग सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक क्षेत्रों के मतदाताओं की राय मिलकर पूरे बिहार का राजनीतिक जनादेश बनाती है। बांकीपुर की हार के बाद बीजेपी के लिए चुनौती CM सम्राट चौधरी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हार के बाद सीधे तौर पर यह स्वीकार किया कि पार्टी को चुनावी रणनीति और संगठन के स्तर पर अपनी कमियों की समीक्षा करने की जरूरत है। बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार ने पार्टी को संगठन और चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि पार्टी से गलती हुई है और अब उस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर की जीत ने जन सुराज को राजनीतिक रूप से नई ऊर्जा दी है। खासकर बांकीपुर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लगातार निशाना बनाने के बाद मिली जीत को जन सुराज अपनी राजनीतिक रणनीति की सफलता के रूप में पेश कर सकती है।  

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