किशनगंज शहर में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर लापरवाही सामने आ रही है। बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में चल रही हजारों दुकानों, प्रतिष्ठानों और निजी संस्थानों में आग से बचाव के सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। इससे किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किशनगंज शहर में करीब 5,000 से 10,000 छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इनमें कपड़ा, किराना, जनरल स्टोर, पुस्तक, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट और निजी अस्पताल शामिल हैं। कई बहुमंजिला इमारतों में भी दुकानें चल रही हैं, जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते रहते हैं। इसके बावजूद ज्यादातर प्रतिष्ठानों में आग बुझाने वाले यंत्र, इमरजेंसी गेट, फायर अलार्म और सुरक्षा उपकरणों के पूरे इंतजाम नहीं हैं। दमकल वाहनों को पहुंचने में होती है मुश्किल शहर के मुख्य बाजार, डे मार्केट, गांधी चौक, धर्मगंज, रूईधासा और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में कई दुकानें तंग गलियों और घनी आबादी वाले इलाकों में हैं। आग लगने पर दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी मुश्किल हो सकती है। खासकर त्योहारों और शादी के मौसम में बाजारों में भीड़ बढ़ने से खतरा और बढ़ जाता है। जानकारों का कहना है कि ज्यादातर दुकानदार आग से बचाव के नियमों पर ध्यान नहीं देते। कई प्रतिष्ठानों में बिजली के तारों का जाल, ओवरलोड कनेक्शन और आग पकड़ने वाली चीजों का ढेर भी खतरा बढ़ा रहा है। निजी अस्पतालों और बड़े व्यावसायिक भवनों में भी समय-समय पर सुरक्षा जांच नहीं होती है, ऐसी शिकायतें भी आती रही हैं। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और फायर ब्रिगेड विभाग से शहर के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कराने, सुरक्षा नियमों का पालन करवाने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। किशनगंज शहर में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर लापरवाही सामने आ रही है। बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में चल रही हजारों दुकानों, प्रतिष्ठानों और निजी संस्थानों में आग से बचाव के सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। इससे किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किशनगंज शहर में करीब 5,000 से 10,000 छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं। इनमें कपड़ा, किराना, जनरल स्टोर, पुस्तक, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट और निजी अस्पताल शामिल हैं। कई बहुमंजिला इमारतों में भी दुकानें चल रही हैं, जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते रहते हैं। इसके बावजूद ज्यादातर प्रतिष्ठानों में आग बुझाने वाले यंत्र, इमरजेंसी गेट, फायर अलार्म और सुरक्षा उपकरणों के पूरे इंतजाम नहीं हैं। दमकल वाहनों को पहुंचने में होती है मुश्किल शहर के मुख्य बाजार, डे मार्केट, गांधी चौक, धर्मगंज, रूईधासा और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में कई दुकानें तंग गलियों और घनी आबादी वाले इलाकों में हैं। आग लगने पर दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी मुश्किल हो सकती है। खासकर त्योहारों और शादी के मौसम में बाजारों में भीड़ बढ़ने से खतरा और बढ़ जाता है। जानकारों का कहना है कि ज्यादातर दुकानदार आग से बचाव के नियमों पर ध्यान नहीं देते। कई प्रतिष्ठानों में बिजली के तारों का जाल, ओवरलोड कनेक्शन और आग पकड़ने वाली चीजों का ढेर भी खतरा बढ़ा रहा है। निजी अस्पतालों और बड़े व्यावसायिक भवनों में भी समय-समय पर सुरक्षा जांच नहीं होती है, ऐसी शिकायतें भी आती रही हैं। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और फायर ब्रिगेड विभाग से शहर के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच कराने, सुरक्षा नियमों का पालन करवाने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

