पूर्णिया के हांसदा के नया टोला कलीजान इलाके में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। इसमें जिला प्रशासन और नगर निगम शामिल थे। सरकारी जमीन पर बने सैकड़ों मकानों को प्रशासन ने तोड़ दिया। इसके लिए 3 जेसीबी और एक पॉकलेन का इस्तेमाल किया गया। ये लोग यहां लंबे समय से रह रहे थे। सुबह तक जो बस्ती भरी-पूरी दिख रही थी, शाम होते-होते वह खाली हो गई। अब वहां सिर्फ मलबा पड़ा है। भारी पुलिस बल के साथ अधिकारी मुस्तैद इस प्रशासनिक कार्रवाई में अधिकारियों की भारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पूर्णिया के नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय की अगुवाई में चले इस अभियान में सदर एसडीएम और सदर एसडीपीओ 1 भी शामिल रहे। साथ ही अंचलाधिकारी से लेकर अंचल और नगर निगम के कर्मी भी मुस्तैद दिखे। अभियान में 3 जेसीबी और 1 पोकलेन मशीन का इस्तेमाल किया गया, जो लगभग दिन भर लगातार चलती रही। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। 25 एकड़ जमीन में से 10 एकड़ खाली कराने का निर्देश हांसदा के इस इलाके में बिहार सरकार की लगभग 25 एकड़ की विशाल भूमि मौजूद है। इसमें से 10 एकड़ जमीन को चिन्हित कर अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश जारी किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन बस्तियों को हटाने के बाद सरकार को करीब 6 से 7 एकड़ जमीन तुरंत खाली और सुलभ रूप से प्राप्त हो जाएगी। कचरा निष्पादन के लिए लगेगी डंपिंग यार्ड की मशीनें इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहर के कचरा प्रबंधन को दुरुस्त करना है। खाली कराई गई जमीन पर डंपिंग यार्ड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत मैटिरियल रिकवरी फैसिलिटी एमआरएफ सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां आधुनिक कचरा निष्पादन मशीनें लगाई जाएँगी, जिससे पूरे नगर निगम क्षेत्र के कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से निपटारा किया जा सकेगा। बेघर हुए परिवारों की गुहार दूसरी ओर, अपने ढहे हुए मकानों और खुले आसमान के नीचे बिखरे सामान के बीच बैठे ग्रामीणों का कहना है कि वे यहाँ अपने पूर्वजों बाप-दादा के समय से बसते आ रहे थे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छिन गई है और वे सड़कों पर आने को मजबूर हैं। हालाँकि नगर आयुक्त ने भूमिहीन परिवारों को जमीन देने का भरोसा दिया है। जंगल साफ करके 80 90 सालों से बसे थे स्थानीय ग्रामीण ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए दैनिक भास्कर डिजिटल से बताया कि इस कार्रवाई से कम से कम 100 से 150 घर बेघर हो गए हैं। लोग यहां 80 से 90 वर्षों से जंगल साफ-सुथरा करके रह रहे थे, लेकिन बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके घर-द्वार तोड़ दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले गरीब लोग 10 से 20 लाख रुपये की जमीन कहां से खरीदेंगे और अब वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएंगे। जंगल में ही झोपड़ी बनाकर रहना पड़ेगा दैनिक भास्कर डिजिटल से बात करते हुए बेघर हुई महिला ने बातचीत के दौरान बताया कि वे लोग इस इलाके में बहुत लंबे समय से रह रहे हैं और उनका मुख्य काम मेहनत-मजदूरी करके खाना है। बेघर होने के बाद अब उनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा है, और मजबूरी में उन्हें जंगल में ही झोपड़ी बनाकर रहना पड़ेगा। बसाने या जमीन देने के संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बुजुर्ग ग्रामीण ने जानकारी दी कि वे लोग यहां पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके दादा-परदादा तथा माता-पिता के समय से यह बस्ती बसी हुई है। उन्होंने बताया कि इस इलाके में लगभग 500 से अधिक घर हैं, और इस कार्यवाही में सैंकड़ों घर टूटे हैं । प्रशासन द्वारा जमीन खाली कराने के बाद उन्हें अन्यत्र बसाने या जमीन देने के संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। माता-पिता तथा पूर्वज यहीं गुजर गए वहीं बुजुर्ग महिला ने रोते हुए कहा कि वे पिछले 50 वर्षों से इस जगह पर रह रहे हैं और उनके माता-पिता तथा पूर्वज यहीं गुजर गए। अचानक घर गिराए जाने के बाद वे समझ नहीं पा रही हैं कि अब वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएं। नियमानुसार भूमि चिन्हित कर पर्चा उपलब्ध कराया जाएगा: नगर आयुक्त मामले की संपूर्ण जानकारी देते हुए पूर्णिया नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि हांसदा में डंपिंग यार्ड के समीप सरकारी भूमि पर जो अस्थायी अतिक्रमण था, उसे हटाने की कार्रवाई की गई है। यहाँ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत एमआरएफ सेंटर और वेस्ट प्रोसेसिंग का निर्माण कराया जाना है। कार्रवाई से पहले माइकिंग के जरिए लोगों को अस्थायी निर्माण हटाने की सूचना दे दी गई थी। सरकार के नियमों के अनुसार जो लोग वास्तविक रूप से भूमिहीन हैं, उन्हें नियमानुसार भूमि चिन्हित कर पर्चा उपलब्ध कराया जाएगा।” पूर्णिया के हांसदा के नया टोला कलीजान इलाके में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। इसमें जिला प्रशासन और नगर निगम शामिल थे। सरकारी जमीन पर बने सैकड़ों मकानों को प्रशासन ने तोड़ दिया। इसके लिए 3 जेसीबी और एक पॉकलेन का इस्तेमाल किया गया। ये लोग यहां लंबे समय से रह रहे थे। सुबह तक जो बस्ती भरी-पूरी दिख रही थी, शाम होते-होते वह खाली हो गई। अब वहां सिर्फ मलबा पड़ा है। भारी पुलिस बल के साथ अधिकारी मुस्तैद इस प्रशासनिक कार्रवाई में अधिकारियों की भारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पूर्णिया के नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय की अगुवाई में चले इस अभियान में सदर एसडीएम और सदर एसडीपीओ 1 भी शामिल रहे। साथ ही अंचलाधिकारी से लेकर अंचल और नगर निगम के कर्मी भी मुस्तैद दिखे। अभियान में 3 जेसीबी और 1 पोकलेन मशीन का इस्तेमाल किया गया, जो लगभग दिन भर लगातार चलती रही। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। 25 एकड़ जमीन में से 10 एकड़ खाली कराने का निर्देश हांसदा के इस इलाके में बिहार सरकार की लगभग 25 एकड़ की विशाल भूमि मौजूद है। इसमें से 10 एकड़ जमीन को चिन्हित कर अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश जारी किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन बस्तियों को हटाने के बाद सरकार को करीब 6 से 7 एकड़ जमीन तुरंत खाली और सुलभ रूप से प्राप्त हो जाएगी। कचरा निष्पादन के लिए लगेगी डंपिंग यार्ड की मशीनें इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहर के कचरा प्रबंधन को दुरुस्त करना है। खाली कराई गई जमीन पर डंपिंग यार्ड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत मैटिरियल रिकवरी फैसिलिटी एमआरएफ सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां आधुनिक कचरा निष्पादन मशीनें लगाई जाएँगी, जिससे पूरे नगर निगम क्षेत्र के कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से निपटारा किया जा सकेगा। बेघर हुए परिवारों की गुहार दूसरी ओर, अपने ढहे हुए मकानों और खुले आसमान के नीचे बिखरे सामान के बीच बैठे ग्रामीणों का कहना है कि वे यहाँ अपने पूर्वजों बाप-दादा के समय से बसते आ रहे थे। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छिन गई है और वे सड़कों पर आने को मजबूर हैं। हालाँकि नगर आयुक्त ने भूमिहीन परिवारों को जमीन देने का भरोसा दिया है। जंगल साफ करके 80 90 सालों से बसे थे स्थानीय ग्रामीण ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए दैनिक भास्कर डिजिटल से बताया कि इस कार्रवाई से कम से कम 100 से 150 घर बेघर हो गए हैं। लोग यहां 80 से 90 वर्षों से जंगल साफ-सुथरा करके रह रहे थे, लेकिन बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके घर-द्वार तोड़ दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले गरीब लोग 10 से 20 लाख रुपये की जमीन कहां से खरीदेंगे और अब वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएंगे। जंगल में ही झोपड़ी बनाकर रहना पड़ेगा दैनिक भास्कर डिजिटल से बात करते हुए बेघर हुई महिला ने बातचीत के दौरान बताया कि वे लोग इस इलाके में बहुत लंबे समय से रह रहे हैं और उनका मुख्य काम मेहनत-मजदूरी करके खाना है। बेघर होने के बाद अब उनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा है, और मजबूरी में उन्हें जंगल में ही झोपड़ी बनाकर रहना पड़ेगा। बसाने या जमीन देने के संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बुजुर्ग ग्रामीण ने जानकारी दी कि वे लोग यहां पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके दादा-परदादा तथा माता-पिता के समय से यह बस्ती बसी हुई है। उन्होंने बताया कि इस इलाके में लगभग 500 से अधिक घर हैं, और इस कार्यवाही में सैंकड़ों घर टूटे हैं । प्रशासन द्वारा जमीन खाली कराने के बाद उन्हें अन्यत्र बसाने या जमीन देने के संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। माता-पिता तथा पूर्वज यहीं गुजर गए वहीं बुजुर्ग महिला ने रोते हुए कहा कि वे पिछले 50 वर्षों से इस जगह पर रह रहे हैं और उनके माता-पिता तथा पूर्वज यहीं गुजर गए। अचानक घर गिराए जाने के बाद वे समझ नहीं पा रही हैं कि अब वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएं। नियमानुसार भूमि चिन्हित कर पर्चा उपलब्ध कराया जाएगा: नगर आयुक्त मामले की संपूर्ण जानकारी देते हुए पूर्णिया नगर आयुक्त अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि हांसदा में डंपिंग यार्ड के समीप सरकारी भूमि पर जो अस्थायी अतिक्रमण था, उसे हटाने की कार्रवाई की गई है। यहाँ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत एमआरएफ सेंटर और वेस्ट प्रोसेसिंग का निर्माण कराया जाना है। कार्रवाई से पहले माइकिंग के जरिए लोगों को अस्थायी निर्माण हटाने की सूचना दे दी गई थी। सरकार के नियमों के अनुसार जो लोग वास्तविक रूप से भूमिहीन हैं, उन्हें नियमानुसार भूमि चिन्हित कर पर्चा उपलब्ध कराया जाएगा।”

