पश्चिम चंपारण में किसानों-मजदूरों का मार्च,CEC का पुतला फूंका:SIR प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची दुरुस्त करने की मांग

पश्चिम चंपारण में किसानों-मजदूरों का मार्च,CEC का पुतला फूंका:SIR प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची दुरुस्त करने की मांग

पश्चिम चंपारण में किसानों और मजदूरों ने शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर शहर में मार्च निकाला। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची को नए सिरे से दुरुस्त करने की मांग उठाई। उन्होंने सभी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। रिक्शा मजदूर सभा भवन से निकला मार्च मार्च की शुरुआत रिक्शा मजदूर सभा भवन से हुई। प्रदर्शनकारी शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से होते हुए सोवा बाबू चौक पहुंचे। यहां मार्च सभा में तब्दील हो गया, जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। इस दौरान एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में नारे लगाए गए और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया। एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल अखिल भारतीय किसान सभा की केंद्रीय किसान कमेटी के सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण करोड़ों लोग मतदान के अधिकार से वंचित हुए हैं। उन्होंने मतदाता सूची की पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करने की मांग की। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प एटक नेता ओमप्रकाश क्रांति ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में शामिल किसान और मजदूर नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और आम नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करने पर जोर दिया। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता हुए शामिल प्रदर्शन में संयुक्त किसान मोर्चा, अखिल भारतीय किसान सभा, एटक सहित विभिन्न संगठनों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। पश्चिम चंपारण में किसानों और मजदूरों ने शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर शहर में मार्च निकाला। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची को नए सिरे से दुरुस्त करने की मांग उठाई। उन्होंने सभी पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। रिक्शा मजदूर सभा भवन से निकला मार्च मार्च की शुरुआत रिक्शा मजदूर सभा भवन से हुई। प्रदर्शनकारी शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से होते हुए सोवा बाबू चौक पहुंचे। यहां मार्च सभा में तब्दील हो गया, जहां मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। इस दौरान एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में नारे लगाए गए और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया। एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल अखिल भारतीय किसान सभा की केंद्रीय किसान कमेटी के सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण करोड़ों लोग मतदान के अधिकार से वंचित हुए हैं। उन्होंने मतदाता सूची की पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करने की मांग की। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प एटक नेता ओमप्रकाश क्रांति ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में शामिल किसान और मजदूर नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और आम नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करने पर जोर दिया। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता हुए शामिल प्रदर्शन में संयुक्त किसान मोर्चा, अखिल भारतीय किसान सभा, एटक सहित विभिन्न संगठनों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।  

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