भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के कैंपस में कर्मचारी संगठन ने द्वार सभा का आयोजन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार की नीतियों के प्रति रोष व्यक्त किया और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। इसकी अध्यक्षता संगठन के प्रधान अशोक पिलानिया ने की, जबकि मंच संचालन महासचिव जोगेंद्र थिलौड़ ने किया। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि बोर्ड प्रशासन वर्तमान में कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय लगातार झूठे दिलासे दे रहा है। संगठन के प्रधान अशोक पिलानिया ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि बोर्ड प्रशासन फिलहाल दमनकारी नीति अपनाते हुए कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं कर रहा है। इसके विपरीत कुछ लोगों के कहने पर गुमराह होकर कर्मचारी विरोधी कार्य किए जा रहे हैं। जिससे बोर्ड कार्यालय के तमाम कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। यदि प्रशासन ने शिक्षा बोर्ड के मूलभूत ढांचे के साथ किसी भी प्रकार की छेड़खानी करने की नापाक चेष्टा की, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा और इसके गंभीर परिणामों के लिए प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। बोर्ड से अलग किए बड़े राजकीय विद्यालयों का मुद्दा उठाया महासचिव जोगेंद्र थिलौड़ ने शिक्षा बोर्ड से अलग किए गए बड़े राजकीय विद्यालयों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार और प्रशासन को चेताते हुए कहा कि यदि समय रहते शिक्षा बोर्ड से अलग किए गए बड़े राजकीय विद्यालयों को वापस हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से नहीं जोड़ा जाता, तो आने वाले समय में बिजली बोर्ड आंदोलन की तर्ज पर आमजन को साथ लेकर एक बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। संगठन नेताओं ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि प्रदेश के आम जनसाधारण, गरीब, किसान और मजदूरों के बच्चों की शिक्षा को बचाने की मुहिम है। इस अवसर पर वरिष्ठ उपप्रधान अमनदीप सिंह, उपप्रधान सोमवीर पुनिया, अशोक लाम्बा, सलाहकार सत्यवीर स्वामी, अरुण कुमार आदि मौजूद रहे।

